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स्पेशल स्टोरी
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ऐसी बेबसी आगे न दिखे

— अनिल चतुर्वेदी — पैर सूज गए..बिवाईयां फट गई...छाले पड़ गए, लेकिन घर जाने के जुनून के आगे ये असहनीय पीड़ा भी बैनी हो गई। जरा सोचिए, किस दिमागी उलझन और तनाव में एक इंसान अपनी कर्मस्थली से वापस घर लौटने को मजबूर हुआ है। वह भी खुद के पांवों पर। देश के करोड़ों लोग ऐसे ही पैदल निकले हैं सडक़ों पर। उनके पेट...

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कोरोना पर बेअसर गर्मी

- हेमलता चतुर्वेदी - कोरोना वायरस जब संक्रमण के शुरूआती दौर में था तो माना जा रहा था कि गर्मी का मौसम आने के साथ ही संक्रमण के फैलाव पर रोक लग जाएगी परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं हुआ। गर्मी आने के बाद तो कोरोना संक्रमण के मामले और तेजी से बढ़े हैं। इधर केंद्र व राज्य सरकारों ने लॉकडाउन से अनलॉक की तरफ...

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हम संवेदना शून्य हो गए

— आभा शर्मा — जानलेवा कोरोना वायरस कोविड-19 की महामारी ने पूरी दुनिया का परिदृश्य बदल दिया है। ऐसा नहीं है कि पहले सार्स, इबोला, एंथ्रेक्स जैसे वायरस या प्लेग आदि महामारी का आक्रमण न हुआ हो, लेकिन कोरोना ने जैसा जबरदस्त झटका समूचे विश्व को दिया है, ऐसा पहली बार हुआ है। करीब एक शताब्दी पहले स्पेनिश...

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‘इंडिया’ के लॉकडाउन में ‘भारत’ बेहाल

- प्रेसवाणी डेस्क - एक महामारी से बचने के लिए देश-दुनिया में लॉकडाउन किया गया, ये अच्छा फैसला रहा। पहली नजर में ये फैसला मानव कल्याण की सोच से लिया गया लगता है। जरूरत के लिहाज से, जब तक कोरोना वायरस के इलाज की कोई वैक्सीन या दवा नहीं तैयार हो जाती, तब तक तो इंसानी जिंदगी बचाने का लॉकडाउन ही एक मात्र...