press-vani
  • press-vani
  • press-vani
  • press-vani
देश स्तब्ध: सुप्रीम कोर्ट में बगावत का धमाका

स्वतंत्र भारत और सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार शीर्ष अदालत के चार जजों ने मीडिया के सामने आकर देश से सुप्रीम कोर्ट को बचाने की अपील की ताकि देश में लोकतंत्र बचा रह सके। इन जजों के रुख को भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ खुली बगावत माना जा रहा है।
शुक्रवार को जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ, रंजन गोगोई और जे चेलामेश्वर ने जस्टिस जे चेलामेश्वर के सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इन चारों जजों की तरफ से जस्टिस जे चेलामेश्वर ने कहा, ‘हमारी संस्था (सुप्रीम कोर्ट) और देश के लिए जिम्मेदारी है। सीजेआई (भारत के मुख्य न्यायाधीश) को इस संस्था (सुप्रीम कोर्ट) की रक्षा के लिए कदम उठाने के बारे में समझाने की हमारी कोशिशें नाकाम रही हैं। हम लोग आज (शुक्रवार) सुबह ही भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने गए और उन्हें समझाने की कोशिश की कि कुछ चीजें सही नहीं हैं और इन्हें सुधारने के लिए उनको कदम उठाना चाहिए। दुर्भाग्य से हम उन्हें नहीं समझा पाए। उन्होंने आगे कहा, हम सब (चारों जज) मानते हैं कि जब तक इस संस्था (सुप्रीम कोर्ट) की रक्षा नहीं की जाती है और इसकी गंभीरता को बनाए नहीं रखा जाता है, इस देश में या किसी भी देश में लोकतंत्र नहीं बच पाएगा।
जस्टिस जे चेलामेश्वर के अनुसार बीते कुछ महीनों में ऐसी बहुत सी बातें हुई हैं, जिनकी जरूरत नहीं थी। जब जजों से पूछा गया कि क्या वे मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की मांग करते हैं तो उन्होंने कहा, इसे देश को तय करने दीजिए। इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की वजह पर जस्टिस जे चेलामेश्वर ने कहा कि हम लोग नहीं चाहते कि आज से 20 साल बाद कोई यह कहे कि जस्टिस चेलामेश्वर, गोगोई, लोकुर और कुरियन जोसेफ ने अपनी आत्मा बेच दी थी और संविधान के हिसाब से काम नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कामकाज ठीक से नहीं चल रहा है, इसलिए उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

अब चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा भी इस मुद्दे पर जवाब दे सकते हैं। जस्टिस मिश्रा प्रेस कांफ्रेंस में अपने साथ अटॉर्नी जनरल को भी ला सकते हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस मामले में दूरी बनाई है। सरकारी सूत्रों की मानें, तो केंद्र अभी जस्टिस मिश्रा के किसी कमेंट का इंतज़ार कर रहा है। उसी के बाद ही सरकार अपना रुख भी सामने लाएगी।

यूपीए सरकार में कानून मंत्री रह चुके अश्विनी कुमार ने जज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कहा कि ये न्यायपालिका की छवि के लिए बड़ा नुकसान है। वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम ने इस पूरे मामले पर कहा कि ये न्यायपालिका के लिए काला दिन है। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हर कोई न्यायपालिका के फैसले को शक की निगाहों से देखेगा। उन्होंने कहा कि अब से हर फैसले पर सवाल उठने शुरू हो जाएंगे। वरिष्ठ वकील सुब्रमण्यम स्वामी बोले- पीएम मोदी को मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।

press-vani
एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
press-vani ad