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राफेल सौदे में फिर हुआ एक खुलासा

अंग्रेजी अखबार द हिन्दू ने राफेल सौदे से जुड़ा नया दावा किया है। उसका कहना है कि डील साइन होने से पहले भ्रष्टाचार विरोधी जुर्माने के प्रमुख प्रावधान और एक एस्क्रो अकाउंट हटा दिया गया था। अखबार का कहना है कि रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार खत्म करने पर जोर देने का दावा करने वाली सरकार की ओर से राफेल डील में बड़ी रियायत बरती गई थी।
अखबार ने आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने सितंबर 2016 में दो सरकारों के बीच हुए एग्रीमेंट, सप्लाई प्रोटोकॉल, ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट और ऑफसेट शेड्यूल में 8 बदलाव मंजूर किए थे।
रिपोर्ट के अनुसार राफेल सौदे में उच्च स्तरीय राजनीतिक दखलंदाजी हुई थी। अनुचित प्रभाव के इस्तेमाल पर जुर्माना, एजेंट कमीशन, दैसो और एमबीडीए फ्रांस कंपनी के खाते तक पहुंच के प्रावधान डील के मसौदे से हटा दिए गए।
अखबार की रिपोर्ट में कह गया है कि 23 सितंबर 2016 को भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के अनुसार दैसो राफेल विमानों की सप्लायर है और एमबीडीए फ्रांस भारतीय वायुसेना के लिए हथियारों की सप्लायर है। राफेल सौदे का समझौता और दस्तावेजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी (सिक्योरिटी) 24 अगस्त 2016 को ही मंजूर कर चुकी थी।
कुछ दिन पहले द हिन्दू ने यह दावा भी किया था कि डील के वक्त प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से समानांतर वार्ता की जा रही थी। रक्षा मंत्रालय ने उस पर आपत्ति जताई थी।

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