press-vani
  • press-vani
  • press-vani
  • press-vani
शिक्षित युवा को नहीं लक्षित नौकरी

- अतुल कुमार माथुर -

बेरोजगारी की समस्या बढ़ती आबादी के साथ और गंभीर होती जा रही है। हमारे देश में अधिकतर लोग आर्थिक और अन्य अनेक कारणों के चलते अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित नहीं कर पाते हैं। स्वरोजगार की संस्कृति का समुचित विकास नहीं हो पाया है। इसलिए लगभग सभी लोग किसी न किसी प्रकार की नौकरी करना ही पसंद करते हैं।
बड़ी संख्या में लोग इसीलिए बेरोजगार हैं क्योंकि उनके पास योग्यता का अभाव है। किसी प्रकार का कौशल या अनुभव नहीं होने के कारण वे अपना स्वयं का रोजगार स्थापित नहीं कर पाते और साथ ही कोई नौकरी प्राप्त करने में भी असमर्थ रहते हैं। एक दूसरा बड़ा वर्ग इसलिए बेरोजगार है क्योंकि उनकी योग्यता के अनुरूप समुचित संख्या में नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के प्रचार-प्रसार के कारण शिक्षित बेरोजगारों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। चिंता का विषय है कि ऐसे बेरोजगारों मेें उनकी भी बड़ी संख्या होती है जो उच्च शिक्षा या तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अपना मनचाहा रोजगार प्राप्त करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।
सरकारी नौकरी का मोह
नौकरियां या तो निजी क्षेत्र में मिल सकती हैं अथवा सरकारी क्षेत्र में। कोई और विकल्प नहीं होने के कारण अधिकांश लोग निजी क्षेत्र में जैसी भी नौकरी मिल जाती है कर लेते हैं। परंतु अधिकतर लोगों की पहली चाहत सरकारी नौकरी प्राप्त करना ही होता है। निजी क्षेत्र में सेवा शर्तें बहुत आकर्षक और सुविधाजनक नहीं होती हैं और सेवाकाल की कोई गारंटी नहीं होती। मालिक-नौकर संबंधों की विशिष्ट प्रकृति केे कारण निजी क्षेत्र में नौकरी एक सुविधाजनक और आकर्षक विकल्प नहीं बन पा रहा है। ऐसे में सरकारी नौकरियों पर दबाव दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है।
आम लोग सरकारी नौकरी प्राप्त करना अपना अधिकार समझते हैं। सरकारी नौकरी में मास्टर-नौकर जैसे संबंध भी नहीं होते क्योंकि कोई किसी का मास्टर वास्तविक रूप से होता ही नहीं है। सब का स्वामी सरकार होती है और सरकार लोगों की होती है। सरकारी नौकरियों के प्रति मोह के और भी कई कारण हैं। इससे सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। देश की शासन प्रणाली में सीधे भागीदारी प्राप्त होती है। देश के विकास और प्रगति के कार्यों में और लोक सेवा के अन्य आयामों में अपना योगदान देने का अवसर प्राप्त होता है। स्वशासन की भावना का पोषण होता है। वेतनमान और सेवा शर्तों में वैधिक निश्चितता होती है। संवैधानिक अधिकार और संरक्षण प्राप्त होता है, इत्यादि-इत्यादि। अधिक योग्यता के बावजूद बहुत लोग कम वेतन वाले छोटे पदों पर भी नियुक्ति का प्रयास करते रहते हैं।
यह एक कटु सत्य है कि देश में लोगों के पास रोजगार के बहुत विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। सरकार एक महत्वपूर्ण और बड़ी नियोक्ता है, परंतु सरकारी क्षेत्र में भी नियोजन की एक सीमा है। आधुनिक प्रबंधन विज्ञान की दृष्टि से सरकारी ढांचा पहले से ही अनावश्यक रूप से बड़ा है। अनावश्यक और अनुपयोगी पदों की भरमार है। कार्य संचालन और निष्पादन में तकनीक का बढ़ता प्रयोग अनेक सेवाओं को ‘आउट सोर्स’ करने की आवश्यकता और सरकारी खर्चे में भारी कमी करने के दबाव के कारण सरकारी नौकरियों में बडी संख्या में कटौती की जा रही है। नए पदों का सृजन भी लगभग बंद हो गया है। इसलिए उपलब्ध सरकारी नौकरियां बहुत सीमित संख्या में ही बची हैं। इस कारण चयन प्रतिस्पर्धाएं भी ‘करो या मरो’ के स्तर तक कठिन हो गई हैं।
ऐसे वातावरण में यह आवश्यक लगता है कि सरकार रोजगार के नए-नए अवसर उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दे। स्किल इण्डिया और मेक इन इण्डिया जैसे कार्यक्रमों को तेजी से चलाया जाए और नए व्यवसाय को स्थापित कर सुगम बनाया जाए।
जब तक सरकारी योजनाएं कोई ठोस परिणाम देना प्रारंभ करें तब तक सरकार को एक निश्चित नियोजन नीति का अनुसरण करके सरकारी क्षेत्र में योग्य लोगों को निरंतर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। एक लोक कल्याणकारी सरकार होने के कारण प्रमुख नियोक्ता के रूप में मानव संसाधन की उपयोगिता समझते हुए समुचित संख्या में सरकारी नौकरियां उपलब्ध करानी चाहिए। अक्षम, कामचोर और भ्रष्ट सरकारी नौकरों की पहचान करके उनके स्थान पर सक्षम, कर्मठ और ईमानदार लोगों को सेवा का अवसर देना चाहिए। सेवा नियमों का सख्ती से पालन करते हुए आयु पूर्ण होने पर अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति करनी चाहिए, जिससे परिणाम स्वरूप नई नियुक्तियों को उचित अवसर प्राप्त हो। केवल अति महत्वपूर्ण कार्यों के लिए एक अपवाद के रूप मंई ही सेवाकाल को बढ़ाना चाहिए और वह भी आवश्यकता के अनुसार कम से कम समय के लिए। अनुभव प्राप्त लोगों की सेवाओं का राष्ट्रहित में उपयोग करते समय इस बात का जरूर ध्यान रखा जाए कि नई नियुक्तियों पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। सभी रिक्त पड़े पदों को तुरंत भर के भविष्य में किसी भी रिक्त पद को वैज्ञानिक तरीकों से तुरंत भरने की व्यवस्था करनी चाहिए।
यह बात सत्य है कि जितनी आवश्यकता किसी योग्य व्यक्ति को जीवन यापन करने के लिए किसी उचित और प्रतिष्ठित रोजगार, खास तौर से सरकारी नौकरी की होती है उतनी या उससे भी अधिक आवश्यकता सरकार को अपनी नौकरियों के लिए योग्य व्यक्तियों की है। किसी भी राष्ट्र के जीवन में या उसके सफल अस्तित्व में उसके सरकारी नौकरशाही के योगदान को किसी भी तरह से कम करके नहीं आंका जा सकता। यह भी आवश्यक है कि सभी नागरिकों को सरकारी नौकरी प्राप्त करने का उचित और समान अवसर प्राप्त हो।

press-vani
हम लोगों की बात...
press-vani ad