press-vani
  • press-vani
  • press-vani
  • press-vani
जेब खाली करते करियर एजेंट

-डॉ. ओंकारनाथ चतुर्वेदी -
लगभग हर साल शैक्षणिक सत्र की शुरूआत के साथ ही अखबारों में कोचिंग सेंटरों के बड़े-बड़े विज्ञापन देखने को मिलने लगते हैं। दसवीं पास जब इंजीनीयर बन सकता है तो क्यों नहीं चंदा उगाही के लिए विज्ञापन दिए जाएं? कक्षा दसवीं और बारहवीं में पास-फेल और कॉलेज के अन्य छात्रों के लिए हार्डवेयर, नेटवर्किंग, सॉफ्टवेयर, एथिकल हैकिंग, साइबर सिक्योरिटी और इंजीनीयर बनने का सुनहरा अवसर कोचिंग इंस्टीट्यूट दे रहे हंै।
देश की हर राजधानी में डिविजनल हैडक्र्वाटर पर कुछ मिले न मिले, कोचिंग की शानदार सफलता दिलाने वाली व्यावसायिक दुकानें हर गांव-तहसील में मिलेंगी। अब तो पटवारी से लेकर आई.ए.एस बनाने के लिए बड़े-बड़े शहरों में कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। अरबों का व्यवसाय है। ‘इंडिया स्टैंड अप’ हो रहा है। और तो और यदि भारत के किसी भी कॉलेज में एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश नहीं मिल रहा हो तो बिना किसी टैस्ट या पूर्व परीक्षा (पीएमटी) पास किए आपके बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए सलाहकार या कमीशन एजेंट चीन, यूक्रेन, नेपाल, जॉर्जिया, अर्मेनिया, कजाकिस्तान, बेलारूस आदि देशों में पढऩे भिजवा सकते हैं। यह एक बहुत बड़ा हवाला बाजार है जो धड़ल्ले से चल रहा है।
सरकार यह सब देख कर भी अनदेखा कर रही है। दशकों तक इसी देश में बिना कोचिंग क्लास के लाखों युवा इंजीनीयर, डॉक्टर,आईएएस और प्रशासनिक अधिकारी बने, जिन्हें फस्र्ट डिवीजन हासिल करने का श्रेय तो मिलता था, नौकरी भी सहज ही मिल जाती थी। यह वो स्वावलम्बी पीढ़ी थी, जिसने अपने नोट्स खुद बनाए थे। मूल पुस्तकों का गहन अध्ययन किया था। विद्यालय अध्यापक-प्राध्यापक भी समर्पित भाव से उस पीढ़ी का भविष्य गढ़ते थे। तब शिक्षा व्यवसाय नहीं थी।
मैं जिस शहर में रहता हूं यानी कोटा, वह देश में शिक्षा के हब के रूप में विख्यात है, जहां परीक्षा परिणाम निकलने के बाद डेढ़-दो लाख विद्यार्थी भविष्य के सपनों को साकार रूप देने के लिए आते हैं।
स्टेशन से बाहर निकलते ही एक विशालकाय होर्डिंग प्रत्याशियों का स्वागत करता है। इस पर शहर के प्रमुख कोचिंग सेंटरो के नाम और फोन नम्बर के लिखे हुए हैं। आप जब तक इस होर्डिंग को पढ़ रहे होंगे तब तक एक ऑटो वाला आपके इंतजार में वहीं खड़ा मिल जाएगा। वह आसानी से सुविधानुसार आपको आपकी पसंद के कोचिंग सेंटर पहुंचा देगा। आपको होस्टल भी दिखा देगा। आपके बच्चे को पसन्द न आए तो उसे बदलवा भी देगा।शहर में तीन हजार से ज्यादा होस्टल हैं, जो छात्रों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पढ़ाई के लिए करीब डेढ़ लाख रूपए कोचिंग शुल्क है। इसके अलावा 50 हजार से एक लाख रूपए तक का होस्टल व्यय अतिरिक्त है। हर काम का कमीशन है। बस, ग्राहक लाओ। शिक्षा का पूर्ण व्यावसायीकरण हो चला है। देश की राजधानी से लेकर हर तहसील तक कोचिंग सेंटरों का मकडज़ाल फैलता जा रहा है।
यदि आपके बेटे को डॉक्टर बनना है तो डोनेशन से चलने वाले ढेर सारे मेडिकल कॉलेज आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं, जहांं 50 लाख रूपए से लेकर एक करोड़ तक का डोनेशन (दान) देकर उस कॉलेज में प्रवेश पाया जा सकता है। विज्ञान संकाय से बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए विदेशी मेडिकल कॉलेजों के द्वार खुले हैं। प्रमोटर डॉक्टर बनने के इच्छुक छात्र को चीन, रूस अमरीका, बेलारूस,यूक्रेन, जॉर्जिया, अर्मेनिया, कजाकिस्तान और फिलीपीन्स में प्रवेश दिला सकता है। इस काम के लिए देश भर में कई दलाल बैठे हैं। बात कमीशन की है। यह सारा बाजार हवाला बाजार है, जहां पूर्व में रजिस्ट्रेशन करवाने पर लैपटॉप मिलता है। शेष 7 साल तक विदेश में पढ़ाई के खर्च के नाम पर आपकी जेब कटती रहती है। इन विदेशी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए पूर्व परीक्षा अनिवार्य नहीं है। कमीशन एजेंट सारी व्यवस्था करवा देगा।
वो दिन लद गए जब गुरू ही भावी पीढ़ी को तैयार किया करते थे। दयानंद सरस्वती, केशवचंद्र सेन, राजा राम मोहन राय जैसे विद्वान इसी परम्परा की देन है। आज ये कोचिंग सेंटर ठीक ऐसा ही काम कर रहे हैं, जैसे कि रेत की तलहटी पर कोई बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी जाए। सुद्ढ़ भविष्य के लिए प्रतिभावान पीढ़ी गढऩे के बजाय बाजारीकरण को महत्व देकर छात्रों को झूठे सपने दिखाए जा रहे हैं और अभिभावकों की जेब खाली हो रही हैं।

press-vani
हम लोगों की बात...
press-vani ad