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लुटियंस दिल्ली की बदलेगी शक्ल

- अजय चतुर्वेदी -
अगर सब कुछ योजना के अनुसार होता गया, तो अगले चार साल में दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र (जोन) की शक्ल बदल जाएगी। ऐसा संभव होगा नया सेंट्रल विस्टा (केंद्रीय वीथी) बनने के बाद। इस महत्वाकांक्षी योजना में कई सरकारी भवनों को गिरा कर नये भवन बनेंगे। नया संसद भवन बनेगा और इसके बाद खाली होने वाली जमीन को विकसित किया जाएगा।

क्या है सेंट्रल विस्टा
अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही मोदी सरकार ने इस दिशा में न सिर्फ तेजी दिखाई, बल्कि गंभीरता से आगे भी बढ़ी है। गहन अध्ययन के बाद जो परियोजना बनी, उसे ‘सेंट्रल विस्टा’ नाम दिया गया और कवायद शुरू कर दी गई। इसके तहत केंद्र सरकार के करीब आठ कार्यालयों - उद्योग भवन, निर्माण भवन, शास्त्री भवन, कृषि भवन आदि को गिरा कर इतने ही नये भवन बनाने की बात कही जा रही है। योजना के अनुसार, राष्ट्रपति भवन के बाद विजय चौक से राजपथ के दोनों तरफ करीब एक से डेढ़ किमी. तक का क्षेत्र नये सिरे से विकसित किया जाएगा। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, इस विशाल परियोजना को पूरा करने के लिए अहमदाबाद की एच.सी.पी. फर्म को चुना गया है। इसके तीनों भाग- केंद्रीय वीथी, नया संसद भवन और राजपथ क्षेत्र - की डिजाइन और विकास एच.पी.सी. द्वारा ही किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, नया ऑफिस कांप्लेक्स मार्च 2024 तक तैयार हो जाएगा। वर्तमान में दिल्ली में करीब तीन दर्जन भवनों में केंद्र सरकार के कार्यालय चल रहे हैं। किराये के भवनों में एन.सी.आर. क्षेत्र में चल रहे केंद्र सरकार के कार्यालयों की संख्या अलग है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि ऐतिहासिक पुराने भवन जैसे नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और वर्तमान संसद भवन नहीं तोड़े जाएंगे, बल्कि इन भवनों में म्यूजियम स्थापित किए जाएंगे। सेंट्रल विस्टा में बनने वाले सभी भवनों की ऊंचाई इंडिया गेट से नीचे रहेगी। इस प्रकार कोई भी नया भवन 7 फुट से अधिक ऊंचा नहीं होगा। नए विस्टा में आठ नये भवनों को बनाने की बात कही गई है। सभी भवन एक दूसरे से जुड़े रहेंगे, ताकि अधिकारी-कर्मचारी बिना वाहन के ही आ जा सकें, जिससे समय की भी बचत होगी। सेंट्रल विस्टा के भवनों को नये संसद भवन से ट्रेवलेटर द्वारा जोड़े जाने की बात भी कही जा रही है। 21 दिसंबर 2019 को जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली के मास्टर प्लान- 2021 में भी नई जरूरतों के मुताबिक बदलाव किया जाएगा। नये भवन त्रिकोणीय अथवा वेव (लहरों) के आकार के होंगे। इस परियोजना की सबसे प्रमुख बात यह होगी कि नये भवन बनाने के दौरान एक भी पेड़ न काटे जाने की बात कही गई है।

नया संसद भवन 2022 तक
पिछले कुछ साल से नया संसद भवन बनाने की मांग उठती रही है। सांसदों के साथ सरकार को भी वर्तमान संसद भवन छोटा और पुराना लगने लगा है। सांसदों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी पिछले कई साल से विचाराधीन है, लेकिन स्थान की कमी के कारण इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया। सेंट्रल विस्टा में संसद के नये भवन को प्रमुखता से शामिल किया गया है। ऐसे में सरकार चाहती है कि 2022 में भारत का 75 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने से पहले अत्याधुनिक संसद भवन बनकर तैयार हो जाय। बताया जाता है कि इसमें सांसदों के लिए भी अलग से ऑफिस की व्यवस्था होगी। हालांकि, सांसदों की संख्या के बारे में आधिकारिक तौर पर अभी कुछ भी नहीं बताया जा रहा, लेकिन ऐसे संकेत जरूर मिल रहे हैं कि आगे चलकर उनकी संख्या बढक़र 900 हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, नया संसद भवन वर्तमान भवन के पास ही बनेगा, जो कि भूकंप रोधी भी होगा। हालांकि, संसद का वर्तमान भवन भूकंप रोधी नहीं है, ऐसा बताया गया है। पुराने संसद भवन को म्यूजियम में तब्दील करने की योजना है।

अंग्रेजों की थी सेंट्रल विस्टा परियोजना
वास्तव में इस परियोजना की शुरुआत ब्रिटेन के हुक्मरानों ने की थी। दिल्ली को सत्ता का प्रमुख केंद्र मानते हुए नये शहर नयी दिल्ली को विकसित करने के लिए उस समय के जाने-माने दो वास्तुकारों - इडविन लैंडसर लुटियंस और हरबर्ट बेकर को 1913 में लंदन से भारत भेजा गया था।। उन्होंने जियोमीट्रिक (ज्यामितीय) डिजाइन-जिसमें हैक्सगान (षटकोण) और ट्राइएंगल (त्रिभुज) को प्रमुखता देते हुए उसी आधार पर नयी दिल्ली को विकसित किया। और यही डिजाइन लुटियंस के सेंट्रल विस्टा की मुख्य बिंदु थी। इन्हीं पर काम शुरू हुआ और 1927 में राष्ट्रपति भवन, 1930 में सचिवालय भवन (नॉर्थ व साउथ ब्लॉक शामिल), हैदराबाद हाउस 1926, इंडिया गेट 1931 और बड़ौदा हाउस 1936 में बनकर तैयार हुए। इसी तरह नेशनल स्टेडियम 1933, जयपुर हाउस 1936, पटियाला हाउस 1938 और बीकानेर हाउस 1939 में बने। 1927 में बने वर्तमान संसद भवन में तब मात्र 100 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था थी। लुटियंस और बेकर का कार्यकाल 1913 से 1939 तक था।
शहरीकरण की बढ़ती जरूरतों के अनुसार, समय पर बदलाव किया जाना एक अच्छा कदम है। उम्मीद की जानी चाहिये कि इस बदलाव के बाद देश की राजधानी में ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं कम होंगी और अधिकारियों को बिना मतलब की भागदौड़ से निजात मिल सकेगी। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि आम जनता को भी खामख्वाह की जद्दोजहद से दो-चार नहीं होना पड़ेगा।

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