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देश की 52.70 प्रतिशत आबादी पर भाजपा का राज
March 11, 2017


विनोद पाठक
राम मंदिर की लहर में जो नहीं हो पाया, वो मोदी लहर ने कर दिखाया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा का देश की 52.70 प्रतिशत आबादी पर राज हो गया है। हिंदी पट्टी पर केसरिया लहरा रहा है। ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा है, जो लोकसभा चुनाव के बाद एक के बाद एक भाजपा सरकार बनी हैं (बिहार और दिल्ली को छोड़कर)। मोदी के प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित होने के बाद भाजपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में एकतरफा जीत हासिल की थी। मध्य प्रदेश में देश की 6 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 2.1 प्रतिशत और राजस्थान में 5.7 प्रतिशत आबादी बसती है। लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी ने हरियाणा (2.1 प्रतिशत), झारखंड (2.7 प्रतिशत), महाराष्ट्र (9.3 प्रतिशत), असम (2.58 प्रतिशत) में जीत हासिल की। गुजरात (5 प्रतिशत) में पहले से पार्टी का राज था। उत्तर प्रदेश देश का राजनीतिक दृष्टि से सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण राज्य है, यहां देश की 16.5 प्रतिशत आबादी रहती है। उत्तराखंड में .83 प्रतिशत आबादी है। एनडीए गठबंधन की सरकारों (जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश) को जोड़ लें तो यहां 5.25 प्रतिशत लोग रहते हैं। कांग्रेस अब कर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम में बची है। गोवा और मणिपुर के नतीजे आए नहीं हैं। इन राज्यों में केवल 8.47 प्रतिशत देश की आबादी रहती है।
इन चुनाव नतीजों से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या देश का जनमानस पुनः राष्ट्रीय दलों की ओर बढ़ रहा है। तीन दशक पहले कुछ ऐसी स्थिति कांग्रेस की होती थी। 1990 से 2013 तक क्षेत्रीय दलों की सरकारें अधिकांश राज्यों में राज करने लगी थीं। अब बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तमिलनाडु, तेलंगाना जैसे कुछ बड़े राज्यों में क्षेत्रीय दल बचें हैं। पंजाब, हिमाचल, कर्नाटक में राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस है। ये ट्रेड यूं चलता रहा तो संभव है, अगले चुनावों में इन राज्यों में राष्ट्रीय दलों की वापसी हो जाए। ये लोकतंत्र के लिए भी बेहतर है। क्षेत्रीय दलों की सत्ता से संकट यही रहता है कि उनके निजी एजेंडे राष्ट्रीय एजेंडे से ऊपर रहते हैं। वो हमेशा मोल-भाव की कोशिशों में रहते हैं।
उत्तर प्रदेश में जीत से मोदी को बूस्टर डोज मिला है। गुजरात, महाराष्ट्र और उड़ीसा के निकाय चुनावों से एक इशारा तो मिल रहा था कि नतीजे भाजपा के पक्ष में जा रहे हैं। इन राज्यों के नतीजों से ये साफ दिख रहा था कि मोदी के कामकाज को न केवल लोग सकारात्मक रूप से ले रहे हैं, बल्कि वो अब भी चुनाव विनर बने हुए हैं। नोटबंदी को लेकर विपक्ष जैसी आलोचना कर रहा था, उसको जनता ने नकार दिया है। उत्तर प्रदेश की जीत से ये संभावना बढ़ी है कि मोदी कुछ कड़े फैसले ले सकते हैं। फिलहाल तो मोदी को चैलेंज करने वाला कोई नेता किसी पार्टी में दिख नहीं रहा है, जैसे उमर अब्दुल्ला ने अपने ट्वीट में कहा है, तो क्या 2019 के लोकसभा चुनाव की पटकथा ये जीत लिख चुकी है और देश की जनता नरेंद्र दमोदर दास मोदी को एक और अवसर देगी? हालांकि, यह भविष्य की गर्त में है और राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता है।

 
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