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जोड़ियां अब स्वर्ग में नहीं बनतीं
July 22, 2017


पीयूष जैन


जो लोग अभी तक यह गलतफहमी पाले हुए हैं कि जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं, वे या तो अपने बच्चों के विवाह समय पर नहीं कर पा रहे या, फिर पण्डितों के चक्कर ही लगाते रहने को मजबूर हैं, यह जानने के लिए कि उनके बालक का विवाह कब होगा या कब तक सम्भव है।
एसे अज्ञानी लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि आबादी बढ़ते जाने के साथ-साथ और उससे भी बड़ा कारण यह कि बालक-बालिका अनुपात बिगड़ जाने के बाद ईश्वर के लिए भी यह काम अकेले कर पाना सम्भव नहीं रहा है। इसलिए उसने इस काम की आउटसोर्सिंग के लिए मेक इन इण्डिया की तर्ज पर फ्रेंचाइजियां बांट दी हैं।
कुण्डली मिलान का काम मोटे तौर पर कम्प्यूटरों के भरोसे छोड़ दिया गया है तो पण्डितों के यहां भीड़ कम हुई है। यानि कि पण्डितों के घरों पर फुट-फाल कम करने में ईश्वर को इससे मदद मिली है और कुण्डली मिलान सॉफ्टवेयर बनाने वालों की चढ़ बनी है। इसके बाद बाजार पूरी तरह जोड़ियां तय करवाने वालों के हाथ में आ गया। परिचय सम्मेलनों की हवा निकल जाने के बाद अब ऐसे सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित होने लगे हैं। व्हाट्सएप इन्स्टेंट मिलान और ऑनलॉइन जोड़ियां तय करने के काम में भारी प्रगति कर रहा है।
कुछ समय पहले राजस्थान के कोटा शहर में एक परिचय सम्मलेन हुआ था जिसमें विवाहोत्सुक युवकों की संख्या युवतियों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा रही, और जो लड़कियां आई थीं वे भी यह दिखाने आईं थी कि इन युवकों में कोई भी हमारे काबिल नहीं। न पढ़ाई-लिखाई में, न प्रोफेशन में और न सुखी जीवन की जरूरतें पूरी करने में ये हमारे योग्य हैं। वहीं, सम्मलेन में आए अधिकतर युवक व्यवसायी तबके से थे और चाहते थे कि उनकी पत्नी संयुक्त परिवार में एडजस्ट होने लायक हो, माता-पिता सेवा की करने में रुचि रखने वाली हो और जो खाना भी लजीज बना सके। उधर अपने जीवन का हर साल डिग्रियां बटोरने में लगी रहीं उम्रदराज लड़कियां हाइली क्वालिफाइड व उच्च स्तर के प्रोफेशनल लड़कों की चाहत लेकर आई थीं। साफ है कि परिचय सम्मेलन को फ्लॉप होना था और ऐसा ही हुआ। लेकिन कुछ ही समय पहले व्हाट्सएप पर नुमूं हुए एक ऑनलाइन मंच ने तबियत बाग-बाग कर दी। सुबह से शुरू हुई संदेश श्रृंखला से ऐसा लगा कि जैसे विवाह की समस्या दो –तीन माह में ही खत्म होने वाली है उसके बाद कोई विवाहयोग्य लड़का कुंवारा नहीं रहेगा यानि कि बैकलॉग खत्म ।
पहले संदेश में बताया गया कि मंच ने सफलता के झण्डे गाड़ते हुए एक ही दिन में छह रिश्ते तय करवाने में सफलता प्राप्त की है और अगले ही घण्टे यह संख्या सौलह तक पहुंच गई। मात्र तीन घंटे में इतने युवक-युवतियों का विवाहबंधन में बंधने के लिए तैयार हो जाना एक गद्गद् कर देने वाला समाचार था।
उसके अगले ही दिन हमारे एक चचेरे भाई ने हमें एक मोबाइल नम्बर भेजते हुए कहा कि इस व्हाट्सएप नम्बर पर लगातार सात शनिवार तक बच्चे का बायोडाटा भेजेंगे तो वे योग्य लड़कियों के बायोडाटा भेजना शुरू कर देंगे। उसने यह भी कहा कि ये सज्जन समाज सेवा के लए यह काम निस्वार्थ भाव से कर रहे हैं और इसका कोई शुल्क भी नहीं लेते।
व्हाट्सएप नम्बर पर सात शनिवार तक बायोडाटा क्यों मांगा जा रहा है, य़ह बात आपके समझ में आई हो तो हमें भी बताएं ताकि स्मार्ट तांत्रिकों का स्टिंग किया सके। जय जय व्हाट्सएप देवता।

 
Comments:
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