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भ्रष्टाचार की जय...
February 23, 2018


संतोष निर्मल

हमारे प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार से बड़ी चिढ़ है, होनी भी चाहिए। क्योंकि भ्रष्टाचार कोई अच्छी चीज नहीं है। इससे व्यक्ति या देश की बदनामी होती है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुर्सी पर बैठते ही कहा था कि न खाऊंगा, न खाने दूंगा। प्रधानमंत्री का तो पता नहीं, लेकिन दूसरे लोग जमकर खा रहे हैं। प्रधानमंत्री भी ये सब देखने को बेबस हैं। लेकिन लगता है कि लोगों ने कुछ ज्यादा ही खा लिया। तभी भारत भ्रष्टाचार के मामले में और आगे बढ़ गया। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि बर्लिन की एक कंपनी के एनालिसिस में यह सामने आया है। इन दिनों जिस तरह की खबरें आ रही हैं, उन्हें देखते हुए इस बात पर ताज्जुब भी नहीं होना चाहिए।

बात ऐसी है कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के वर्ष 2017 के किए गए करप्शन इंडेक्स में भारत दो पायदान फिसलकर 183 देशों में 81वें स्थान पर जा पहुंचा है। 2016 में भारत 79वें नंबर पर था। भारत को इस बार भी 2016 के बराबर 40 प्वाइंट मिले हैं। जिस देश का जितना ज्यादा स्कोर होता है वह उतना कम करप्ट माना जाता है।
बर्लिन स्थित यह एंटी करप्शन निरोधी आर्गनाइजेशन वर्ल्ड बैंक, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और दूसरे ऑर्गनाइजेशन के डाटा के आधार पर दुनियाभर के सरकारी महकमो में करप्शन का एनालिसिस करता है। रैंकिंग के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 0 प्वाइंट (सबसे ज्यादा करप्ट) से 100 प्वाइंट (करप्शन बिल्कुल नहीं) के स्केल का इस्तेमाल किया है। इस तरह 183 देशों में सरकारी संगठनों और कंपनियों में करप्शन का पता लगाया है।
यही नहीं, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भारत को इंडो-पेसिफिक रीजन में करप्शन के साथ-साथ प्रेस की आजादी के लिहाज से सबसे कमजोर देशों में शामिल किया है।
ऑर्गनाइजेशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फिलीपींस, भारत और मालदीव जैसे देशों में न सिर्फ करप्शन, बल्कि जर्नलिस्ट्स की हत्या के मामले भी ज्यादा हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीते छह साल में 10 पत्रकारों में से 9 उन देशों में मारे गए हैं, जिन्हें करप्शन इंडेक्स में 45 या इससे कम नंबर मिले हैं। ऐसे देशों की संख्या दो तिहाई से ज्यादा है। अब लोग प्रधानमंत्री की बात नहीं मान रहे तो क्या किया जा सकता है।

 
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