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सुविधाओं का आकंठ भोग
March 13, 2019


devendra garg
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी सरकारी रीढ की हड्डी बनने का मेहनताना सूद समेत वसूल रहे हैं। जितना बड़ा ओहदा, उतनी ही ज्यादा सुविधाएं भोगने में वे रत्तीभर कंजूसी नहीं कर रहे। राजस्थान में ऐसे सुविधाभोगी अफसरों की संख्या अच्छी-खासी है।
यहां आईएएस के बंगले पर 3-4 गाड़ियां, नौकरों की फौज होना आम है। जितने विभागों का जिम्मा, उतनी गाड़ियां खिदमत में। साहब, बीवी, बच्चे और नौकर सभी के लिए एक-एक गाड़ी की तैनाती। नौकर भी मुफ्त के। उनकी पगार आती है प्लेसमेंट एजेंसियों से। मतलब जो एजेंसियां दफ्तरों में संविदाकर्मी मुहैय्या कराती, वही साहब के घरेलू नौकरों की पगार का इंतजाम भी करती हैं। इसी शर्त पर एजेंसियों को दफ्तरों में संविदाकर्मी रखने का ठेका दिया जाता।
गाड़ियों की बात करें तो सरकारी अमले में ज्यादातर गाड़ियां अनुबंध पर हैं। सूत्रों के अनुसार एक गाड़ी का मासिक किराया तकरीबन 25000रु है। यानि कि एक आईएएस अधिकारी की सेवा में लगी औसतन तीन गाड़ियों का कुल 75000रु मासिक किराया सरकार वहन करती है। इसका दूसरा पहलू यह है कि कनिष्ठ अधिकारी गाड़ियों के लिए तरसते रहते हैं। उनको सरकारी काम के लिए ही अतिरिक्त गाड़ी का इंतजाम करना पड़ता है, जिसका किराया अलग से दिए जाने का मतलब सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना फालतू में ही लगाया जा रहा है।
आईएएस अधिकारियों की शाहखर्ची के और भी नमूने देखने को मिल जाएंगे। इस मामले में सरकारी सूत्र चौंकाने वाले खुलासे करते हैं। बताते हैं कि अधिकारियों के मेहमानों की खातिरदारी मीटिंग्स के नाम पर होती है। सरकारी खर्च पर होने वाली विभागीय बैठकों का पैसा मेहमानों की आवभगत पर व्यय होता है। निजी मेहमानों को सैर-सपाटा भी प्रोटोकॉल के तहत कराया जाता है। इसके लिए विभागीय बाबू की बाकायदा ड्यूटी लगाई जाती है।
सबसे रोचक भूमिका तो अधिकारियों के निजी सहायकों (पीए) की बताई जाती है। सूत्रों के अनुसार साहबों के पीए सरकारी जिम्मेवारी छोड़ इवेंट मैनेजर बन गए हैं, जिनका काम अब केवल साहब के घर की देखभाल, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, मेहमान-नवाजी, पार्टी आयोजन आदि रह गया है। इन खूबियों के चलते दोनों के बीच ऐसी ट्यूनिंग बैठती है कि साहब की हर पोस्टिंग पर वो पीए भी उनके पास ही तैनाती पाता जाता है।
राजस्थान में ऐसे निजी सहायकों को एक नाम दिया गया है—चमचागीरी के भीष्म पितामह। सूत्र कहते हैं कि लगभग हर वरिष्ठ आईएएस आधिकारी का अपना खास पीए है, जो वर्षों से अपने साहब के पास ही नौकरी बजा रहा है।

 
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