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बिखरे सपने
June 25, 2019


devendra garg
कांग्रेस मुखिया के कोप में पीड़ा ज्यादा झलकती लग रही है। पीड़ा उनकी टीम के साथियों ने पहुंचाई है। सबसे चुनौतीपूर्ण जंग में, सबसे पोचा प्रदर्शन करके। वजह चाहे जो भी रही हो, लेकिन कप्तान को जबरदस्त आघात पहुंचा है।
याद कीजिए वो समय जब मुखिया ने पार्टी की कमान सम्भाली थी। कुछ खास करने की तमन्ना में अपनी कोर टीम बनाई थी। उसमें सब युवातुर्क शामिल किए गए थे। महाराजा, पायलट, भंवर, सुरजेवाला आदि सभी पार्टी मुखिया के हमउम्र। जनता को भी उम्मीद जगी थी कि कांग्रेस में पीढीगत बहलाव कुछ अच्छा और नया करेगा।
कोर टीम को लय पकडऩे के लिए पांच-छह साल का समय भी दिया था मुखिया ने। किंतु असल परीक्षा की घड़ी आई तो पसर गए। पार्टी के ‘ओल्ड गार्ड्स’ इसी मौके के इंतजार में थे। युवा तुर्क लडख़ड़ाएं औऱ वो अपनी-अपनी जगह पुर्नस्थापित हो जाएं। आम चुनाव बाद अब कांग्रेस में यही स्थिति बनी है। मुखिया जिनको दूर रखना चाहते थे, वो ही सब इस समय इर्द-गिर्द नजर आ रहे हैं। युवा तुर्क बगलें झांक रहे हैं।
मुखिया इस हाल में हैं कि गम-गलत करें भी तो किसके साथ। किया-धरा तो उन्हीं का है। इसीलिए कोप भवन में बैठे आत्मालोचन कर रहे हैं। कि-आखिर टीम चयन में गलती कैसे हो गई।

 
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