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देखें क्या होता है
November 05, 2019


anil chaturvedi
राजस्थान भाजपा की अब जिसने कमान थामी है, उसके लिए कहा जा सकता है---देर आए, दुरुस्त आए। वर्षों से ये शेखावाटी नेताजी पार्टी के लिए समर्पित भाव से लगे हुए थे। पर उनकी निष्ठा लगातार नजरंदाज की जाती रही। महारानी इन्हें तनिक भाव नहीं दे रहीं थी। पार्टी के वरिष्ठों से जलालत मिलती रही, सो अलग।
किंतु नेताजी बिना विचलित हुए संगठन के कामों में लगे रहे। जो जिम्मा सौंपा गया उसे बखूबी अंजाम देते रहे। तभी तो पार्टी आकाओं की नजर इनपर पड़ी औऱ बना दिया राज्य इकाई का प्रमुख। महारानी को यह फैसला गले नीचे नहीं उतरा। इसीलिए नेताजी की ताजपोशी में शामिल नहीं हुईं। लिखकर भिजवा दिया कि पूजा-पाठ में व्यस्त हैं, इसे छोडक़र नहीं आ सकती हैं।
ये कथन कहीं विवादित न हो जाए, इसलिए कन्याओं को जिमाने की फोटो भी मीडिया में चलवा दी। ताकि ऊपर तक यकीन हो जाए। पर आका भी महारथी हैं। सुर निकलते ही ताल समझ जाते हैं। महारानी के लिए भी समझ गए कि उपेक्षा की नाराजगी है। वरना कौन सियासी पंडित कन्या पूजन के लिए संगठन के जरूरी कार्यक्रम छोड़ता है। अभी खुद महारानी की या उनके किसी वफादार की ताजपोशी होती तो वे सबकुछ छोड़ भागी चली आतीं। अब नापंसद नेता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, तो आगे देखते हैं कि महारानी कितने दिन दूर-दूर रहती हैं।

 
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