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सीएए- केरल सरकार पहुंची शीर्षकोर्ट

केरल सरकार नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। सरकार का तर्क है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन है। सीएए धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल सिद्धांत के खिलाफ है। केरल ऐसा पहला राज्य है, जिसने इस कानून को रद्द करने के लिए 31 दिसंबर को विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया और अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सीएए के खिलाफ पहले ही 60 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी हैं। कोर्ट इन पर 22 जनवरी को सुनवाई करेगा। पिछली एक सुनवाई में शीर्ष अदालत ने इस पर रोक लगाने के इनकार कर दिया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 10 जनवरी को सीएए को लेकर अधिसूचना जारी की है।
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि राज्य में सीएए लागू नहीं किया जाएगा। कई गैर-भाजपा शासित राज्य सीएए को लागू करने से इनकार कर चुके हैं। केरल सरकार ने पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) संशोधन नियम 2015 और विदेशी (संशोधन) आदेश 2015 की वैधता को भी चुनौती दी है। जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उन गैर-मुस्लिम प्रवासियों के रहने को नियमित करता है जो 2015 से पहले भारत में बतौर शरणार्थी रह रहे थे।
अनुच्छेद 14 में समानता के अधिकार का जिक्र है। वहीं, अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रकिया के अतिरिक्त उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। अनुच्छेद 25 में कहा गया है कि सभी व्यक्तियों को अंत:करण और धर्म को अपनाने की स्वतंत्रता है। इससे पहले उत्तर प्रदेश ने सोमवार को पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों की जानकारी गृह मंत्रालय को भेज दी। वह ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया है। देश में सीएए लागू होने के साथ ही योगी सरकार ने प्रदेशभर के शरणार्थियों की सूची बनाना शुरू कर दी थी। अब तक 19 जिलों में रहने वाले 40 हजार अवैध प्रवासियों की जानकारी जुटाई जा चुकी है।

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