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मांसाहार पर सवालिया निशान

- अशोक थपलियाल -
एक दिन रात को अजीब सपना देखा - ‘मैं लजीज मटन कबाब को मुंह में रखने वाला ही था कि पशु-पक्षियों की दशकों पुरानी चीखें और मछलियों की मौन आहें सुनाई दीं। मानो वे सभी पूछ रहे थे- क्या मानव मानवता शब्द को भूल गया है ? मैंने कहा, मैं तो बाबा चार्ल्स डार्विन का समर्थक हूं, जो सरवाइवल ऑफ द फिटेस्ट की बात करते थे। इस पर वे चीखकर बोले, तुम्हारे ही देश में अहिंसक बुद्ध, महावीर, वैष्णवों का जन्म हुआ था। उन्होंने शाकाहार पर बल दिया, लेकिन तुम अपने स्वार्थ में भूल गए कि सदियों से जिन असंख्य पशु-पक्षियों का मांस खा रहे हो, वे कभी भी अप्रत्यक्ष रूप से बदला ले सकते हैं। मैंने पूछा यह कैसे संभव है ? वो बोले, देखा नहीं, हमारी चीखों-आहों से फिर एक वायरस पैदा होकर तुम्हारा संहार कर रहा है। पहले भी कई वायरसों ने ऐसा ही किया, पर तुमने कभी सबक नहीं लिया। यहां तक कि तुमने असंख्य पेड़ काट डाले, नदियों को दूषित कर दिया, फसलों में कीटनाशक छिडक़ दिए और अब गंदे पानी में उगी विषाणुओं से लैस सब्जियां खाने को मजबूर हो।’
मेरा स्वप्न टूटता है। सुबह अखबार-टीवी देखे। वायरस से मौतों के समाचारों ने सोचने पर मजबूर कर दिया कि, अब तो प्राकृतिक विनाश से ही नहीं, बल्कि मांस भक्षण से भी मानव जाति का विनाश हो सकता है। आखिर दो महीने पहले मांस के स्वाद की लार जहरीली क्यों बन गई? शक्तिशाली देश चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान व अन्य इलाकों व दूसरे देशों को मिलाकर हजारों लोग नई तरह के कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए।
बहरहाल, कोरोना वायरस ने चीन के मांस के बाजारों पर ताले जड़ दिए हैं। खासकर वुहान का कुख्यात बाजार। यह वायरस क्यों और कैसे फैला, यह सवाल फिलहाल रहस्य के घेरे में है, लेकिन मौटे तौर पर इसका कारण चीन के वेट मार्केट (ताजा मीट, फिश और दूसरे खराब होने वाले मांस उत्पाद बेचने वाले बाजार) माने जा रहे हैं। कोई यह भी कह रहा है यह रोग चीन में ही वायरस रिसर्च प्रयोगशाला की गलती से फैला। दुनिया में ऐसी कई प्रयोगशालाएं हैं, जिनका उपयोग इंसानों को मारने के लिए हो चुका है -बायोलॉजिकल वारफेयर ।
अब बात करते हैं कोरोना ने कैसे चीनी लोगों के हैरतअंगेज मांसाहार का खुलासा किया है। वे बंदर, कुत्ते, बिल्ली, चूहे, चमगादड़, सांप, छिपकली आदि का मांस भी खाते हैं, जो बीफ-मटन से कई गुना ज्यादा स्वादिष्ट माना जाता है। वेट मार्केटों में ही ऐसे पशु-पक्षियों का अवैध शिकार करके मांस बेचा जाता है। यहां तक कि जिंदा बंदर और गधे के पैर बांधकर शरीर को चीरकर तुरंत उनके अंग अमीर लोगों को परोसे जाते हैं। म्यांमार, इंडोनेशिया के वेट मार्केटों का भी यही हाल है। इंटरनेट पर इनकी तस्वीरें देखकर भारी घृणा और हैरानी होती है। जाहिर है ऐसे बाजारों में साफ-सफाई ताक पर रख दी जाती है, जो खतरनाक वायरस के पनपने की वजह बनी। याद करें, 17 वर्ष पहले 2004 में सार्स वायरस ने भी कहर बरपाया था चीन में और अब कोरोना उसका बाप निकल पड़ा है। उस दौर में भी चीन में सिवेट नस्ल की बिल्लियों को सार्स फैलाने के संदेह में पकड़ा गया, मारा गया। अब कोरोना संक्रमण को भी सिवेट के अलावा अन्य जानवरों से जोड़ा जा रहा है। तभी तो स्थिति की भयावहता से आजिज आकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग को कहना पड़ा- हे मेरे देशवासियों, जानवरों का बेतहाशा शिकार मत करो, उनका स्वाद चखने की सीमाएं मत लांघो, बंद करो यह गंदी आदत।
ये भी सच है कि चीन में कई लोग पारंपरिक फल-सब्जी व धान की खेती को छोडक़र जंगली जानवरों को या उनका मांस बेचकर मोटा मुनाफा कमाने लगे हैं। चीनवासियों के मन में यह विश्वास सदियों से चला आ रहा है कि जंगली जानवरों का मांस खाने या उनके अंगों से बनी दवाओं से बीमारियों का इलाज भी होता है। इसलिए वहां वैध से ज्यादा अवैध शिकार होता है और दूसरे देशों से जानवरों के अंगों (गैंडे के सींग, बाघ की हड्डियां, नाखून) की तस्करी होती है ।
पर अब पछताने से क्या होत है, जब चिडिय़ा चुग गई खेत। जानवरों के लजीज मांस से लार टपका रहे लोगों की सांसों में कोरोना चुपचाप घुस गया और चीन बिना संगीत के करने लगा तांडव, जो बरास्ते चीन दुनिया के 44 देशों में फैल गया। हालांकि मध्य फरवरी के बाद चीन में संक्रमण की दर जरूर घट गई, पर वायरस दूसरे मुल्कों में फैलता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीमें दुनिया के दौरे पर हैं। इसके साथ ही भारत समेत एशिया व यूरोप के शेयर बाजारों में जबरदस्त गिरावट देखी जा रही है।
पुनरावलोकन
यह सर्वविदित है कि बीती सदियों में लाखों की संख्या में चूहे, सूअर, चमगादड़, मुर्गी आदि पशु-पक्षी जिन बैक्टीरिया-वायरस से मारे गए, उन्हीं ने इंसान को भी शिकार बनाया। याद आता है 14 वीं शताब्दी (1331-1353) का महासंहारक बुबोनिक प्लेग, जिससे यूरेशिया (यूरोप-एशिया) में साढ़े 7 करोड़ से लेकर 20 करोड़ लोग मारे गए थे। मध्य एशिया में काले चूहों में पैदा हुए येरसीनिया पेस्टिस नामक बैक्टीरियम ने मानव की सवारी करके पूरब-पश्चिम में वो तबाही मचाई थी, जिसे इतिहास में ब्लैक डेथ कहा गया। उस दौर में भी चीन बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
कोरोना के ताजा हमले से लगता है हालात दिनों-दिन विकट होते जाएंगे। एक तरफ तो पेड़-पौधों के साथ जंगली जानवरों की संख्या घटती जा रही है, दूसरी तरफ समुद्र-नदियां दूषित हैं, तो मानव कब तक जीव-जंतुओं का भक्षण करने लायक रह पाएगा, कहा नहीं जा सकता, लेकिन मांस के अंदर बैठे खतरनाक अदृश्य वायरसों से बचने के लिए शाकाहार के साथ जैविक खेती ही एक रास्ता हो सकता है। साथ ही बचे रह गए पशु-पक्षियों को बचाना होगा, अन्यथा उनके पूर्वजों की चीखें, जो शायद वायुमंडल में ही घूम रही होंगी, स्वार्थी मनुष्य को श्राप देती रहेंगी- जा तुझ पर भी कोरोना, सार्स, स्वाइन फ्लू, इबोला का प्रकोप हो जाए, हमें भी इन वायरसों ने मारा, अब तू भी मर।

कोरोना वायरस : फैक्टफाइल
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इसको आधिकारिक नाम दिया है- सीओवीआइडी-19, अन्य नाम हैं- 2019-एनसीओवी, 2019 नोवेल कोरोनावायरस। जाहिर है कि इसके नाम के साथ वर्ष 2019 जोड़ा गया है क्योंकि यह नया वायरस पिछले साल ही प्रकाश में आया। इस पहले मनुष्यों में इसकी पहचान नहीं हुई थी। यह फ्लू जैसी सांस की बीमारी पैदा करता है।
लक्षण — नाक बहना, गले में खराश, कफ व बुखार। ज्यादा गंभीर स्थिति में न्यूमोनिया या सांस लेने में कठिनाई। इसके अलावा अस्थमा, मधुमेह या हृदय रोग वाले बुजुर्गों को गंभीर परेशानी हो सकती है।
बचाव - अभी तक इस वायरस रोग पर नियंत्रण के लिए कोई टीका (वैक्सीन) या दवा ईजाद नहीं हो पाई है। कोई भी व्यक्ति संक्रमण के खतरे को इस तरह कम कर सकता है -
- हाथों को अल्कोहल-आधारित रब या साबुन व पानी से बार-बार धोएं।
- खांसते-छींकते समय नाक व मुंह को टिश्यू या कोहनी मोडक़र ढकना चाहिए।
- कोल्ड या फ्लू जैसे लक्षणों वाले किसी भी व्यक्ति के करीब (1 मीटर या 3 फीट) न जाएं।
सीओवीआइडी-19 की शुरुआत - चाइना के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में दिसंबर 2019 में इस वायरस का प्रकोप शुरू हुआ। उसके बाद यह चाइना के दूसरे इलाकों और एशिया व यूरोप में फैल गया। इसका संक्रमण बहुत तेजी से फैला है।
कौन से दूसरे देश प्रभावित - चाइना के बाद पड़ोसी दक्षिण कोरिया पर कोरोना का सबसे ज्यादा असर। इसके अलावा ईरान, इटली में मौतें हो चुकी हैं। संक्रमण जापान, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, स्पेन, एस्टोनिया, डेनमार्क, अमेरिका तक पसर गया है। रिपोर्ट लिखे जाने तक दुनियाभर में कोरोना बीमारों की संख्या 81 हजार और 3 हजार तक मौतें हो गई हैं। इसमें चाइना का आंकड़ा 78 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित और मौतें 2700 के पार। दक्षिण कोरिया में 1766 केस और 11 मौतों की खबर है। भारत में दो केस रिपोर्ट हुए हैं। मध्य पूर्व एशिया में संक्रमण ईरान के रास्ते ईराक, कुवैत, बहरीन, यूएई और सऊदी अरब तक पहुंच गया है।

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