press-vani
  • press-vani
  • press-vani
  • press-vani
कोरोना पर बेअसर गर्मी

- हेमलता चतुर्वेदी -
कोरोना वायरस जब संक्रमण के शुरूआती दौर में था तो माना जा रहा था कि गर्मी का मौसम आने के साथ ही संक्रमण के फैलाव पर रोक लग जाएगी परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं हुआ। गर्मी आने के बाद तो कोरोना संक्रमण के मामले और तेजी से बढ़े हैं। इधर केंद्र व राज्य सरकारों ने लॉकडाउन से अनलॉक की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। हालांकि यह अनलॉक अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने के लिए है। आम आदमी को अपनी सेहत की चिंता अब स्वयं ही करनी है। इसलिए जो लोग यह मान कर चल रहे थे कि गर्मी में कोरोना बेअसर हो जाएगा, उनके लिए यह वक्त सावचेती बरतने का है।
दिल्ली, मुंबई से लेकर राजस्थान, गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु सब जगह हर 24 घंटों में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती ही दिखाई दे रही है। हालांकि रिकवरी दर में सुधार है। इसलिए अब वे सारे दावे बेमानी हो गए हैं कि कोरोना वायरस गर्मी में बेअसर हो जाएगा।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस 60 से 70 डिग्री सेल्सियस तापमान तक नष्ट नहीं हो सकता। उतना तापमान न तो भारत में है और न ही किसी देशवासी के शरीर के भीतर। कुछ वायरस तापमान बढऩे के बाद नष्ट होते हैं, लेकिन कोरोना वायरस पर बढ़ते तापमान का क्या असर होगा? इसके बारे में ब्रिटिश डॉक्टर सारा जार्विस कहती हैं कि नवंबर 2002 में सार्स महामारी शुरू हुई थी जो जुलाई में खत्म हो गई थी। लेकिन ये तापमान बदलने की वजह से हुआ या किसी और वजह से, ये बताना मुश्किल है।
तथ्यों व आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे कि मई में कोरोना संक्रमितों की संख्या मार्च व अप्रेल के मामलों को मिलाकर भी अधिक है। हालांकि वायरस पर शोध करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि अगर कोई भरी गर्मी में छींका तो थूक के ड्रॉपलेट जमीनी सतह पर गिर कर जल्दी सूख सकते हैं और कोरोना का संक्रमण कुछ कम हो सकता है। मगर व्यवहारिक तौर पर यह इसलिए गलत साबित हो रहा है कि इस वायरस के वाहक मानव हैं। जिस भी सतह पर संक्रमित व्यक्ति के मुंह से गिरे कण हैं, उसे अगर अन्य व्यक्ति अनजाने में ही छू ले और अपने हाथ मुंह, आंख व नाक के पास ले जाए तो वह संक्रमण फैलाने की अगली कड़ी बन चुका होता है, क्योंकि जमीन के अलावा वायरस अन्य सतहों पर अलग-अलग अवधि तक जीवित रहता है।
मई माह में कोरोना संक्रमितों की संख्या मार्च और अप्रेल माह के कुल मरीजों की संख्या से अधिक पाई गई है। गौर करें कि अभी जिन देशों में यह वायरस सक्रिय है, उनमें बहुत गर्म और उमस वाले देश भी शामिल हैं। हालांकि बहुत से अप्रकाशित अनुसंधानों में यही दावा किया गया है कि बढ़ता तापमान इस वायरस की गति को धीमा कर देगा। लेकिन जानकार इससे सहमत नहीं हैं।
मौसम का असर महामारी पर नहीं
जानकारों का कहना है कि महामारियां अक्सर आम बीमारियों के मौसम चक्र की पाबंद नहीं होतीं। मिसाल के लिए स्पेनिश फ्लू भीषण गर्मी के मौसम में अपने चरम पर पहुंचा था। कई अन्य महामारियां सर्दी के मौसम में फैली थीं। ‘कोरोना‘ वायरस के पूरे परिवार को- ‘एनवेलप्ड वायरस‘ कहते हैं। इन वायरस पर प्रोटीन की एक परत होती है। इसे कोरोना इसलिए कहते हैं कि इसकी सतह पर क्राउन या ताज की तरह नोकें निकली दिखती हैं। वायरस के इस परिवार में नया सदस्य है कोविड-19। इस तरह के प्रोटीन की परत वाले वायरस में अक्सर मौसम चक्र की मार झेलने की क्षमता अधिक होती है।
एक अन्य अध्ययन के अनुसार कोविड-19 ऐसे देश और इलाकों में तेजी से फैला है, जहां औसत तापमान 5 से 11 डिग्री सेल्सियस रहता है। नमी आमतौर पर कम रहती है। लेकिन गरम देशों में भी खासी संख्या में कोरोना मरीज देखने को मिले हैं। एशिया में तापमान यूरोपीय और अमरीकी देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। फिर भी नया कोरोना वायरस यहां तेजी से फैल रहा है। लिहाजा कहना मुश्किल है कि ज्यादा तापमान होने पर कोविड-19 कमजोर पड़ जाएगा।

press-vani
हम लोगों की बात...
press-vani ad