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दिल्ली नहीं बन सकता पूर्ण राज्य

- अजय चतुर्वेदी
क्या दिल्ली पूर्ण राज्य बनेगा? क्या सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना चाहती है? ये अनुत्तरित प्रश्न पिछले कई सालों से राजनीति के मैदान में फुटबाल बने हुए हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस लोकसभा चुनाव में इसे खास मुद्दा बनाया हुआ है।
सत्ता में आने के बाद से ही अधिकारों के लिए आप सरकार की केन्द्र सरकार और उप राज्यपाल से नोक झोंक हो रही है। दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से आप सरकार अधिकारों की लडाई के मुकदमें हार चुकी है। दोनों अदालतों ने उप राजपाल को ही प्रशासनिक प्रमुख माना है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को मिलजुल कर काम करने की सलाह भी दी है। आप ने अब लडाई को जनता के बीच ले जाने की नीति के तहत दिल्ली राज्य को चुनावी मुद्दा बनाया है।
अदालतों के फैसले से दुखी आप लोकसभा चुनाव में इस बार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के मुद्दे पर ही उतरी है। पार्टी का कहना है कि दुनिया के तमाम देशों की राजधानियों में लोगों की चुनी हुई सरकार को सब अधिकार मिले हुए हैं। ब्रिटेन की राजधानी लंदन, जर्मनी की राजधानी बर्लिन, रुस की राजधानी मास्को और अमरीका की राजधानी वाशिंग्टन डीसी में स्थानीय पुलिस अफसरों की नियुक्ति और तबादले, जमीन और शहरी योजनाएं, आवास, परिवहन आदि विषय वहीं की चुनी हुई सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आप ने सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करने की बात कही है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आप इस मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है। क्योंकि 25 साल पुराने इस ढांचे में पांच साल तक भाजपा और पंद्रह साल तक कांग्रेस ने सफलतापूर्वक शासन किया और कभी भी किसी प्रकार का केन्द्र से टकराव भी नहीं हुआ। अरविंद केजरीवाल को भी इस ढांचे के बारे में पूरी जानकारी थी, लेकिन जानबूझकर वे प्रसाशनिक ढांचे से खिलवाड़ करते रहे। इसीलिए हर स्तर पर वे कानूनी लड़ाई हारे।
कानून के जानकारों का कहना है कि दिल्ली राज्य नहीं है। यह केन्द्र शासित प्रदेश है, इसलिए सारी शक्तियां संसद के पास हैं। संविधान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 'दिल्ली केन्द्र शासित है, जिसकी विधानसभा और निर्वाचित प्रतिनिधियों को कुछ सीमित अधिकार दिए गए हैं। संसद ने सम्पूर्ण समवर्ती विधाई शक्तियां अपने पास सुरक्षित रखी हैं। संघ शासित प्रदेश का शासन एक प्रशासक के माध्यम से चलाया जायेगा, जिसे राष्ट्रपति द्वारा एन सी टी एक्ट के तहत नियुक्त किया जाएगा और उसे उप राज्यपाल का नाम दिया गया है। दिल्ली के बारे में इतनी स्पष्ट व्याख्या के बावजूद आप का पूर्ण राज्य की मांग करना समझ से परे है।
कानूनविद सुभाष कश्यप आप के उस दावे को भी गलत बताते हैं, जिसमें कई देशों की राजधानी को अधिकारियों के तबादले, शहरी योजनाओं, परिवहन आदि के अधिकार स्थानीय चुनी हुई सरकारों के पास होने का दावा किया गया है। कश्यप के अनुसार डिस्ट्रिक्ट कोलंबिया की कांग्रेस के पास सभी प्रमुख अधिकार हैं। वाशिंग्टन डीसी की स्थानीय सरकार को कुछ ही अधिकार दिए गए हैं। कोई भी देश राजधानी वाले शहर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दे सकता।

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