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पाकिस्तान नहीं भरोसे लायक

--मे.ज.अजय कु. चतुर्वेदी--

14 फरवरी 2019 का दिन आतंकवाद के खिलाफ भारतीय अभियान का काला अध्याय बन गया, जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमले में 39 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए। शुरूआती तहकीकात मे सामने आया कि हमले के लिए आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया। अब आरडीएक्स भारत में तो उपलब्ध है नहीं। इसलिए सवाल उठता है कि क्या यह पाकिस्तान से तस्करी करके लाया गया। पाकिस्तानी आतंकी गुट जैश-ए-मुहम्मद ने इस हमले की जिम्मेवारी तो ली ही है, लेकिन साथ ही ऐसे बहुत से साक्ष्य मिले हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो जाता है कि उक्त हमले में आईएसआई का हाथ है।
घटना के बाद देश भर में आतंकियों के प्रति आक्रोश है। वहीं प्रधानमंत्री ने भी सेना को खुली छूट दी है कि वह दुश्मन देश के साथ निपटने के लिए हर प्रकार से स्वतंत्र है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की केबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस)की बेैठक में पाकिस्तान संबंधी कई निर्णय लिए गए। एक कदम तो यह उठाया गया कि 1996 में डब्लूटीओ समझौते के तहत पाकिस्तान को दिया गया मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा वापस ले लिया गया। दूसरा, भारत पेरिस स्थित वित्तीय कार्रवाई कार्यबल(एफएटीएफ), जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंक को फंडिंग की निगरानी एजेंसी है, के समक्ष यह मुद्दा उठाएगा कि आतंक को पालने वाले पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए। एफएटीएफ द्वारा किसी देश को ब्लैकलिस्ट किए जाने का मतलब है कि वह देश काले धन और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जंग में सहयोग नहीं कर रहा है।
अगर एफएटीएफ पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर देता है तो इसका अर्थ होगा कि बड़ी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं, जैसे आईएमएफ, वल्र्ड बैंक, एडीबी और ईयू पाकिस्तान को ऋण देना बंद कर दें। साथ ही मूडीज, एस एंड पी और फिच द्वारा रेटिंग में भी पिछड़ जाए। फिलहाल एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा हुआ है, जिसका अर्थ है, अगर पाकिस्तान का कोई भी संगठन आतंकी गतिविधि में लिप्त पाया गया तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
भारत के पक्ष में एक और बात यह हुई कि इस्लामिक देशों के संगठन (ओआईसी) ने आबूधाबी में आयोजित अपने कार्यक्रम में भारत को विशिष्ट अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था और पाक द्वारा इस पर आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार करने की धमकी के बावजूद संगठन ने भारत को दिया आमंत्रण कायम रखा। अमरीका, फ्रांस और ग्रेट ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव रखा है। प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और सीबीआई घाटी में उन लोगों के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार कर रही है, जो वहां हवाला का पैसा पहुंचा कर पत्थरबाजी और अशांति फैलाने के अन्य कारनामों को अंजाम देते हंै। इसके बावजूद सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार युद्ध विराम उल्लंघन की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि भारतीय सेनाएं जवाबी कार्यवाही में पीछे नहीं हैं। बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर भारत ने पाक के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर अपनी इस आत्मरक्षात्मक कर्यवाही के लिए विश्व भर से वाह-वाही लूटी।
इस हमले में भारतीय वायुसेना ने स्पाइस-2000 से लेजर गाइडेड 1000 किलोग्राम भार वाले बम का इस्तेमाल किया। बिना कोई जान-माल के नुकसान के पूर्ण सफलता हासिल करने वाला भारतीय वायुसेना का यह अभियान सराहनीय रहा। 1971 के बाद पहली बार भारतीय वायुसेना ने नियंत्रण रेखा से पार जा कर कार्रवाई की। इस अभियान में आपसी समन्वय का बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला, जहां हेरॉन यूएवी और अवाक् को सफलतापूर्वक सर्विलांस के लिए उपयोग किया गया। भारत की राजनीतिक इच्छा शक्ति के बल पर फलीभूत इस आत्मरक्षात्मक कदम ने दुनिया को दिखा दिया कि अगर कोई दुश्मन भारत की रक्षा के साथ खिलवाड़ करेगा तो यह जवाबी कार्यवाही करने में सक्षम है।
इस सारे घटनाक्रम में गलती से पाक सीमा में पहुंचे विंग कमांडर अभिनंदन को पाक द्वारा पकड़ लिए जाने और भारत के कूटनीतिक कदमों के बीच उन्हें भारत को लौटाने का वाकया भी विश्व स्तर पर भारत का कद बढ़ा गया। फिलहाल भारत-पाक सीमा पर तनाव जारी है। यह प्रश्न भी अभी अनुत्तरित ही है कि पाकिस्तान भारत पर आतंकी हमले करना कब बंद करेगा। भारत को पाकिस्तान के खिलाफ तब तक लड़ाई जारी रखनी होगी, जब तक कि वह भारत में आतंकियों की घुसपैठ और आतंकी हमलों को अंजाम देता रहेगा। भारत को पाक में घुस कर इसके आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने तक चैन से नहीं बैठना है। एक बात का खास खयाल रखना इस वक्त भाारत के लिए बड़ी चुनौती है, वह है-सडक़ मार्ग खोलते समय बरती जाने वाली सावधानी और सम्पूर्ण चैकिंग। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि पाक के नापाक मंसूबों पर पानी फेरने के लिए भारत को हर वक्त चाक-चौबंद रहना होगा।

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