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पत्रकार के रिहाई आदेश, राहुल का तंज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट लिखने वाले पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाई है। साथ ही गिरफ्तार पत्रकार प्रशांत को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। इसबीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तंज कसा है कि योगी की तरह उनके खिलाफ लिखने वाले पत्रकारों पर भी कार्रवाई की गई तो कई मीडिया हाउसों में स्टाफ की कमी पड़ जाएगी।
मंगलवार को कनौजिया के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा कि आप किसी भी नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं कर सकते हैं। नागरिकों के अधिकारों को बचाए रखना जरूरी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि आपत्तिजनक पोस्ट पर विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन गिरफ्तारी क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत कनौजिया की पत्नी को मामले को हाईकोर्ट ले जाने को कहा है। प्रशांत कनौजिया को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 505 के तहत इस मामले में एफआईआर दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए। जस्टिस बनर्जी ने कमेंट किया कि हम उसके (पत्रकार) के काम की तारीफ नहीं कर रहे हैं, ना ही उनपर लगे आरोपों का खंडन कर रहे हैं। लेकिन ऐसा करने वाले को जेल में रखना ठीक नहीं है। जस्टिस बनर्जी ने कहा कि हम उस देश में रह रहे हैं जहां पर संविधान लागू है।
प्रशांत कनौजिया एक फ्रीलांस पत्रकार हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश की पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया था। उनपर आरोप है कि उन्होंने ट्विटर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट किया था। यूपी में उनकी गिरफ्तारी के अलावा न्यूज चैनल के हेड और संपादक को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। चैनल ने योगी आदित्यनाथ पर एक डिबेट का आयोजन किया था। इतना ही नहीं, पत्रकार की गिरफ्तारी के बाद योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर से भी दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। गोरखपुर के पीर मोहम्मद और धर्मेंद्र भारती ने भी सीएम योगी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट लिखा था।
इधर, राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि अगर इस तरह उनके खिलाफ लिखने वाले पत्रकारों पर एक्शन शुरू हुआ तो मीडिया हाउस में स्टाफ की कमी पड़ जाएगी। उन्होंने कहा, अगर हर पत्रकार जो मेरे खिलाफ फर्जी आरोप लगाकर आरएसएस-भाजपा का प्रायोजित एजेंडा चलाते हैं, अगर उन्हें जेल में डाल दिया गया तो न्यूज़पेपर और न्यूज़ चैनलों में स्टाफ की कमी पड़ जाएगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मूर्खतापूर्ण रवैया अपना रहे हैं। गिरफ्तार किए गए पत्रकारों को तुरंत रिहा करने की जरूरत है।

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