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अब कर्नाटक के सहकारी बैंक पर पाबंदी

आरबीआई ने लेनदेन में कथित अनियमितताओं को लेकर बेंगलुरु स्थित श्री गुरु राघवेंद्र सहकारी बैंक पर तत्काल प्रभाव से बैन लगा दिया। यह कर्नाटक में अग्रणी सहकारी बैंक के तौर पर जाना जाता है। बैंक की स्थािपना 1999 में हुई थी।
इस बैंक की कर्नाटक में 6 ब्रांच हैं। बैंक की वेबसाइट के अनुसार इसकी कुल नेटवर्थ 100 करोड़ से अधिक है। आरबीआई की बैन के बाद अब इस बैंक के ग्राहक खाते से सिर्फ 35 हजार रुपये निकाल सकेंगे। यह बैंक अगले छह महीने तक रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना कोई नया लोन नहीं दे सकेगा। यानी ग्राहकों को नया कर्ज नहीं मिल सकता है। साथ ही बैंक में नए निवेशों की इजाजत पर 6 महीने तक के लिए रोक लगा दी गई है। हालांकि यह नहीं कहा गया है कि बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा, केवल प्रतिबंध लगाया गया है।
आरबीआई के इस फैसले की वजह से बैंक के ग्राहकों को काफी परेशानी हो रही है। एक महिला ग्राहक ने बताया, मेरे पति के 15-20 लाख रुपये डिपॉजिट हैं। वह रिटायर हो चुके हैं। अब हम इसी रकम पर निर्भर हैं। हम बैंक पर पाबंदी से खुश नहीं हैं। हालांकि बैंक के चेयरमैन ने कहा है कि ग्राहकों के पैसे 100 फीसदी सुरक्षित हैं।
आरबीआई ने यह एक्शन बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 35 के तहत लिया है। इस धारा के तहत आरबीआई को यह अधिकार है कि वह किसी भी बैंक के खिलाफ अनियमितता की शिकायत पर ऐसी कार्रवाई कर सकता है। इससे पहले पीएमसी बैंक पर भी ये कार्रवाई हो चुकी है। केंद्रीय बैंक ने बीते साल पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) पर 6 महीने की पाबंदी लगाई थी। हालांकि आरबीआई के इस फैसले से पीएमसी बैंक के ग्राहकों को काफी दिक्कदतों का सामना करना पड़ा।

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