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करीने से गढें... नया कश्मीर

— अनिल चतुर्वेदी —
जन्नते-कश्मीर को पूरी तरह भारत का हिस्सा बनाने की साध अब जाकर पूरी हुई है। धारा 370 और धारा 35 ए में संशोधन से ऐसा मुमकिन हो पाया। आगे भारत सरकार को देश का माथा संवारने का काम शुरू करना है। ये प्रक्रिया भी खासी जटिल होने वाली है। कश्मीर का भविष्य कैसे चमकाया जाए, इसपर बहुत सूझ-बूझकर और उल्लेखनीय ईमानदारी के साथ आगे बढना होगा। व्यवसाईयों का दबाव हावी नहीं होने देना है। वरना ये खूबसूरत इलाका बदरंग होने में देर नहीं करेगा।
भारत सरकार के पास कश्मीर को अपने सुनियोजित विकास का ब्रांड बनाने का सुनहरा मौका है। वो चाहे तो दुनियाभर में इस ब्रांड का सिक्का जम सकता है। इसके लिए सरकार को कश्मीर में ईको-फ्रेंडली विकास पर ही जोर देना होगा। ऐसे कई उद्योग हैं, जो पर्यावरण अनुकूल हैं। उनसे न तो पारिस्थितिकीय नुकसान की आशंका है, न ही आबो-हवा खराब होने की गुंजाइश रहेगी। अत्याधुनिक तकनीक से लैस ये उद्योग-धंधे कश्मीरियों की रोजगार समस्या को दूर करने के साथ ही वहां की नैसर्गिक सुंदरता को भी अक्षुण्ण बनाए रख सकेंगे।
मौजूदा वक्त में कश्मीर का आर्थिक ढांचा मजबूत करना बेहद जरूरी है। उद्योग पनपने से इसमें मजबूती लायी जा सकती है। औद्योगिक विकास के साथ ही इस भू-भाग में नगरीय, रिहायशी इलाकों का विकास भी वहां की भौगोलिक संरचना के हिसाब से होना जरूरी है। गगनचुंबी इमारतों का निर्माण कश्मीर को जन्नत नहीं रहने देगा। ऐसी इमारतों के जंगल में महानगरीय कोलाहल का उभार, देश के माथे का नूर बिगाड़ के रख देगा।
कश्मीर से खनन उद्योग को तो पूरी तरह से दूर रखना होगा। वरना पहाड़ और घाटियों की हसीन वादियों का नजारा ख्वाब बन कर रह जाएगा। हमारे सामने राजस्थान, कर्नाटक आदि राज्यों के उदाहरण हैं। ये राज्य क्या थे और आज क्या हो गए हैं। इन राज्यों में बड़े-बड़े पहाड़ खोद डाले गए। जंगलात, हरियाली गायब कर दी गई। प्रकृतिक झरने, जलाशय सुखा दिए गए। मिट्टी, बालू (बजरी) और पत्थर के उत्खनन ने इन राज्यों की खूबसूरती हर ली। इस दुर्दशा से सबक लेते हुए सरकार को कश्मीर में खनन माफिया का प्रवेश प्रतिबंधित करना होगा। भले ही इसके लिए विशेष कानूनी प्रावधान ही क्यों न करने पड़ें।
प्रस्तुत अंक में कश्मीर के विकास को ही मुद्दा बनाया गया है। इस भू-भाग का प्राकृतिक सौंदर्य बनाए रखना सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य है। यही मान कर पत्रिका में इस मुद्दे पर विचारणीय आलेख दिए जा रहे हैं। ताकि नया कश्मीर करीने से गढा जाए, जिससे उसका मुस्तक्बिल सोने सा दमके। और तवारीख़ सुनहरे हर्फों से लिखी जाए। इस राज्य का नायाब विकास भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले का विरोध करने वालों को खुद-ब-खुद खामोश कर देगा।

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