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देशभर में बदलती राजनीति

- श्री कृष्णा -
सीमा पर स्थित जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने के लिए 1949 में भारतीय संविधान में शामिल की गई धारा 370 को 5 व 6 अगस्त को निष्प्रभावी कर दिया गया। इस दौरान संसद में काफी शोर-शराबा हुआ और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी इस मामले पर बंटा हुआ दिखा। संसद ने तीन चौथाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया।
इसके साथ ही 1984 में लाए गए भाजपा के पालमपुर प्रस्ताव के तीन वादों में से एक पूरा हो गया। अन्य दो हैं-समान नागरिक संहिता और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण। यह एक प्रकार से नरेंद्र मोदी सरकार की राजनीतिक जीत ही कही जाएगी,क्योंकि सरकार के इस कदम पर विपक्ष साफ तौर पर बँटता दिखाई दिया, खास तौर पर कांग्रेस। कांग्रेस के जनार्दन द्विवेदी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धारा 370 का समर्थन किया। इसके अलावा राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर बसपा, बीजद, वाईएसआर कांग्रेस, एआईडीएमके और शिवसेना ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा ‘आज सही मायनों में जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बना है।’ द्विवेदी ने कहा-उन्हें इस बात का संतोष है कि आजादी के समय की गई गलती सुधार ली गई है। यह मामला काफी लम्बे समय से खिंचता चला आ रहा है। बहुत से स्वतंत्रता सेनानी इस पक्ष में नहीं थे कि धारा 370 लगाई जाए। मैंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के नेतृत्व में राजनीति सीखी है, जो व्यक्तिगत तौर पर इस अनुच्छेद के खिलाफ थे। यह एक राष्ट्रीय संतोष का विषय है। खैर, देर से ही सही आज यह गलती सुधार ली गई है। कांग्रेस के ही पूर्व सांसद दीपेंन्द्र हुड्डा ने ट्वीट करके कहा, ‘‘मेरी निजी राय है कि 21 वीं सदी में अनुच्छेद 370 की कोई आवश्यकता नहीं है।’
इस संबंध में कांग्रेस में मतभेद उस वक्त और उभर कर सामने आए, जब पूर्व महाराजा हरिसिंह के पुत्र कांग्रेस नेता कर्णसिंह ने कहा, वे जम्मू-कश्मीर में होने वाले हर घटनाक्रम को लेकर ‘निंदा करने के लिए निंदा करना’ उचित नहीं मानते, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसके बहुत से सकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि देशवासियों में भेद करने वाली धारा 35 ए का हटाया जाना भी जरूरी था। इसके साथ ही पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को मताधिकार देने व अनुसूचित जातियों को आरक्षण का स्वागत किया जाना चाहिए। सिंह ने यह भी कहा, नए सिरे से परिसीमन होगा। पहली बार जम्मू और कश्मीरी इलाकों के बीच राजनीतिक शक्तियों का निष्पक्ष रूप से बँटवारा हो सकेगा। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी का नाम लिए बिना सिंह ने कहा, दो राजनीतिक दलों को ‘राष्ट्र विरोधी’ ठहराना उचित नहीं। उन्होने कहा,जहाँ तक कश्मीर का सवाल है,वहाँ के लोगों की मन:स्थिति समझना जरूरी है। राजनीतिक संवाद बनाए रखना जरूरी है। दो मुख्य धारा की राजनीतिक पार्टियों को राष्ट्र विरोधी बताना अनुचित है। इन पार्टियों के कई कार्यकर्ताओं ने सालों साल देश के लिए बलिदान दिया है। इसके अलावा ये दोनों ही पार्टियां समय-समय पर केंद्र व राज्य में बड़ी पार्टियों के सहयोगी दलों के रूप में सत्ता संभालती रही है।
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा है कि एक बार शांति बहाल हो जाए और स्थितियों में सुधार हो जाए तो कश्मीर को पुन: राज्य का दर्जा दे दिया जाएगा। देखना यह है कि घाटी में आतंकी घटनाओं में कितनी कमी आती है। भारत का यह कदम उस वक्त आया है, जब अमरीका ने अपने रूख में बदलाव करते हुए अफगनिस्तान में तालिबान से निपटने के लिए पाकिस्तान की सहायता मांगी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 2020 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले अफगानिस्तान में तैनात सेनाओं को वापस बुलाना चाहते हैं।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमरीका में दिए एक बयान में स्वीकार किया है कि उनके देश में करीब 30 से 40 हजार आतंकी हैं और भारत के इस कदम के बाद पाता नहीं क्या स्थिति हो। कहीं ये आतंकी ज्यादा गड़बडिय़ां फैलाने के लिए सीमाओं के पार ही न निकल जाएं। बदली परिस्थितियों में इससे निपटने के उपाय सोचे जाएंगे। जम्मू-कश्मीर में सामान्य हालात कायम करने के लिए इतना बड़ा कदम उठाने के बाद मोदी सरकार इसके कानूनी और राजनीतिक प्रभाव से किस तरह निपटती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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