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क्या हुआ मोदी मैजिक को !

- अनिल चतुर्वेदी -
करीब साढ़े तीन साल बाद मोदी मैजिक की चमक उतर गई लगती है। गुजरात विधानसभा के चुनाव परिणाम यही इशारा करते हैं। जिस प्रकार वहां लगातार सत्ता में रहने के बावजूद नतीजों की कमजोरी सामने आई है, वो भाजपा की बेचैनी बढ़ाने के लिए काफी है। अधिक चिंताजनक बात ये है कि देश भर में मैजिक चलाने वाले प्रधान सेवक के गृह राज्य में लगभग दो दशक बाद उनका प्रभा मंडल निस्तेज दिखा है।
ये सही है कि गुजरात के साथ हुए हिमाचल प्रदेश विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने शानदार सफलता पाई है। इससे अब 19 राज्यों में पार्टी की सरकारें बन गई हैं। प्रधान सेवक नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का यह रिकॉर्ड प्रदर्शन कहा जा रहा है। क्योंकि इतने राज्यों में तो स्व. इंदिरा गांधी भी कांग्रेस की सरकार नहीं बनवा पाई थीं। जबकि भारतीय राजनीति में एक समय उनका सितारा बुलंदी पर था।
मोदी की और भी कई उपलब्धियों गिनाई जा सकती हैं। किंतु इस बार उन्हें अपना गढ़ बचाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ गया। फिर भी सफलता की वो चमक नजर नहीं आई जो विगत चुनावों में दिखाई दी थी। हालिया गुजरात चुनाव में वहां भाजपा ने पहली बार 100 सीटें जीतकर जैसे-तैसे सत्ता बचाई है। भाजपा ने तो 99 सीट जीती, लेकिन एक निर्दलीय के साथ आ जाने से ये आंकड़ा 100 पर पहुंच गया। यही फीका प्रदर्शन मोदी मैजिक की आभा कम पड़ जाने का संकेत देता है। जनादेश ने मोदी पर गुजरातियों का विश्वासपात्र बने रहने की मोहर तो लगा दी, लेकिन उनके और भाजपाईयों के दंभ को थामने का भी काम कर दिया। इस वास्तविकता को सच्चा राष्ट्रभक्त होने का डंका पीटने वालों को अच्छे से समझना होगा। अन्यथा आगे आने वाली अहम चुनावी वेला में जीत का स्वाद कड़वा हो सकता है।
इन राष्ट्र प्रेमियों को यह भी समझना होगा कि अपने विरोधियों के खिलाफ कड़वे बोल निकाल कर, उनका उपहास उड़ा कर कुछ हासिल नहीं होगा। ऐसा करके समुदाय विशेष का ध्रुवीकरण भी संभव नहीं है। जिस जमात को गोलबंद करने के इरादे से देश भर में विपरीत सोच व आस्था वालों के खिलाफ जहर उगला जा रहा है, इस कुचेष्टा को गुजरात के लोगों ने नकार दिया है। ये हकीकत नजरंदाज नहीं की जा सकती है। गुजरात में पप्पू नाम देकर जिस युवा नेता की खिल्ली उड़ाई गई, उसी ने शालीन व गरिमापूर्ण चुनाव प्रचार के सहारे न सिर्फ लोगों का दिल जीता, बल्कि मृतप्राय: कांग्रेस को सत्ता के नजदीक तक पहुंचा दिया। भाजपा वहां बहुमत से केवल आठ सीट अधिक जीती है। दस विधायकों के इधर-उधर होते ही सत्ता परिवर्तन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
मित्रों, गुजरात व हिमाचल के चुनावी नतीजों को ही प्रस्तुत अंक का प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। साथ ही अंदर के पेजों पर हमारी ओर से एक भावपूर्ण अपील भी की गई है। आशा करते हैं कि आप इस अपील पर जरूर ध्यान देंने और हमारी ओर सहयोग का हाथ बढ़ाएंगे।
आने वाला नया साल आपके लिए और आपके महत्वपूर्ण सहयोग से हमारे लिए नई खुशियां तथा नई उर्जा लेकर आए....प्रेसवाणी परिवार यही कामना करता है।

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एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
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