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पाक में चांद देखने पर बवाल

पाकिस्तान ने रमजान का चांद देखने और इसी अनुसार कैलेंडर तय करने के लिए एक नई कमेटी का गठन किया है। यही कमेटी सांइटिफिक कैलेंडर के आधार पर ईद उल फितर, ईद उल अजहा और मोहर्रम की तारीखों की घोषणा करेगी। हालांकि पाकिस्तान सरकार की इस घोषणा से मौलवी और धर्मगुरु नाराज़ हो गए हैं।

पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीक मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने चांद की गति के आधार पर नया कैलेंडर तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय नई कमेटी बना दी है। दरअसल पाकिस्तान में हर चांद देखने को लेकर विवाद भी होता रहा है।
विज्ञान और तकनीक मंत्रालय का कहना है कि इससे कोई शिकायत नहीं होगी और एकदम मुकम्मल तिथियों की घोषणा की जा सकेगी। साइंटिफिक आधार पर जो कैंलेंडर तैयार किया जाएगा, वो सौ फीसदी परफेक्ट होगा। लेकिन ये घोषणा होते ही पाकिस्तान के मौलवियों का गुस्सा फूट पड़ा है। पाकिस्तान में इस काम के लिए सरकार की बनाई रोहेते हिलाल कमेटी (चांद देखने वाली कमेटी) है जो ये ऐलान करती है कि रोजे कब से शुरू होंगे या कब ईद मनाई जाएगी।
सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए पुरानी कमेटी के प्रमुख मुफ्ती मुनीब उर रहमान ने चेतावनी दे डाली कि मंत्री चौधरी को अपनी हद में रहना चाहिए। धार्मिक मामलों में सिर्फ संबंधित मंत्रियों को ही बोलना चाहिए। हर मंत्री जो धर्म की संवेदनशीलता को नहीं जानता, नहीं समझता उसे धार्मिक मामलों में बोलने का कोई हक नहीं। उन्होंने कहा, उसकी कमेटी में भी अंतरिक्ष और मौसम विज्ञान से जुड़े लोग हैं तो नई कमेटी का क्या औचित्य।
पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों से एक और चीज होती है, जो त्योहारों के मौके पर चांद को लेकर मतभेद को बढ़ा देती है। उत्तर पश्चिमी सूबे खैबर पख्तूनख्वाह की राजधानी पेशावर में रहने वाले मौलाना शहाबुद्दीन पोपलजई काफी प्रभावशाली हैं। वो रमजान और ईद के दिन का ऐलान पाकिस्तान सरकार की पुरानी रोहेते हिलाल कमेटी की तुलना में एक दिन पहले कर देते हैं। कई सालों से मौलवी पोपलजई को मनाने की कोशिश हो रही है, लेकिन वो टस से मस नहीं होते। दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के विज्ञान मंत्री की घोषणा को देश के युवाओं ने सराहा है। सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने सरकार का शुक्रिया अदा किया है। लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्हें लगता है कि ये काम मौलवियों के ही हाथ में रहना चाहिए. सरकार को इसमें दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए।

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