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लाल नाक, कान व गाल बीमारी सूचक

— डॉ. ऋषि भार्गव
नाक, कान लाल होना भी त्वचा के रोग में गिना जाता है। कभी-कभी ऐसे रोगी आते हैं जिनके दोनों कान लाल होते हैं और साथ ही नाक भी लाल हो जाती है। कुछ रोगी ऐसे होते हैं जिनके गाल टमाटर की तरह लाल हो जाते हैं और निरंतर चिकित्सा के बाद भी सही नहीं होते हैं। छोटे-छोटे बच्चों में सर्दी के मौसम में सर्दी के कारण सर्द हवाओं से और ज्यादा देर बच्चों को धूप में रखने से गाल लाल हो हाते हैं। ज्यादा सर्दी के कारण नाक और कान भी लाल हो जाते हैं। जिन रोगियों का रंग साफ होता है, वे अगर ज्यादा समय तक स्टेराइड क्रीम लगाएं तो भी गाल लाल हो जाते हैं। जिन रोगियों में एलर्जी की समस्या होती है, उनके भी कान लाल हो जाते हैं तथा गर्म भी हो जाते हैं।
लाल गाल, लाल नाक, अथवा लाल कान रोगी के बताने पर सीधे-सीधे दिख जाते हैं परन्तु इसका कारण जानना और उसका निराकरण उतना ही मुश्किल होता है। बच्चों में रोग होने पर बच्चों के माता-पिता से रोग का इतिहास जानना आवश्यक है। उसके बाद हाथ लगा कर त्वचा का तापमान देखा जाना चाहिए।
यह देखना महत्वपूर्ण है कि अंगूठे से दबाने पर लाल निशान बना रहता है अथवा लुप्त हो जाता है। इससे रोग के कारण का पता लगता है और वह चिकित्सा में लाभदायक होता है। यदि कान लाल हो और तापमान ज्यादा है तो पूरे शरीर की त्वचा पर भी ऐसे निशान देखे जा सकते हैं। यदि ऐसा है तो यह शरीर में एलर्जी का लक्षण है और उसे एलर्जी की दवाइयों से ठीक किया जा सकता है।
यदि बच्चे को जन्म से कोई चर्म रोग है और इसके लिए बच्चे के गाल पर स्टेरॉइड क्रीम लगाई जाती है तो उससे होने वाले लाल निशान के लिए स्टेरॉइड क्रीम धीरे-धीरे बंद करनी पड़ती है और इसके बदले कम प्रभावी स्टेरॉइड क्रीम तथा टेकरोलीमस या पेचरोलीनस क्रीम, हाईड्रो कोर्टिसन के साथ इस्तेमाल की जाती है।
एलर्जी ठीक करने वाली दवाएं, विटामिन सी तथा रोगी को वजन के हिसाब से बीटाब्लॉकर देने से ये निशान ठीक होते हैं। चिकित्सक को रोगी अथवा उसके माता-पिता को पूर्ण विश्वास दिलाना पड़ता है और इस संबंध में रोगी के साथ ही चिकित्सक को भी चिकित्सा के दौरान धैर्य रखना चाहिए।

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