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फिर दिखी नूरा कुश्ती

- देवेन्द्र गर्ग -
इस साल हुए आईपीएल के 12 वें संस्करण में शुरुआत से ही सट्टेबाजी की अफवाह जोरों से फैली रही। राजस्थान पुलिस ने तीन सटोरियों को पकड़ा। उनसे पूछताछ में सामने आया कि उनके रात दुबई में बैठे दाउद के गुर्गे लालचंद उर्फ एलसी से जुड़े हुए हैं। जयपुर के सवाईमानसिंह स्टेडियम में हुए तीन मैचों में जिस प्रकार मैचों का रुख एन वक्त पर बदला उससे लगा कि कहीं इस खेल में नूरा कुश्ती तो नहीं हो रही। पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह अनेक खिलाडी एन वक्त पर रनआउट हुए, आसान कैच टपकाए गए, स्थिति नियंत्रण में होने के बाद भी बल्लेबाज अनावश्यक रूप से शॉट खेलकर आउट होकर पैवेलियन लौट गए और मैच को फंसाया गया, उससे इन मैचों की रिकॉर्डिंग देखकर विभिन्न एजेंसियां जांच—पडताल में जुटी हुई हैं। खिलाडिय़ों के मोबाइल डिटेल और बैंक खाते खंगाले जा रहे हैं। कोई बड़ी बात नहीं कि आने वाले कुछ दिनों में फिर से कुछ खिलाडी जेल में नजर आएं।

देश में लोकप्रिय 20-20
भारत ने 2007 टी—20 विश्व कप जीता था, जिसके बाद भारत में २०-20 क्रिकेट की लोकप्रियता तेजी से फैली। इस फटाफट क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की दीवानगी को भुनाने के लिए नए तर्ज में आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) टूर्नामेंट के आयोजन की योजना बनाई गई। इस टूर्नामेंट का प्रारूप इंग्लिश प्रीमियर लीग (फुटबाल) और अमेरिका की नेशनल बास्केटबॉल लीग (एनबीए) की तरह बनाया गया। साल 2008 में लॉन्च किये गये आईपीएल टूर्नामेंट के पीछे ललित मोदी का था दिमाग जो आईपीएल के कमिश्नर भी बने। ललित मोदी विशुद्ध रूप से एक व्यवसायी हैं और उन्होंने इस टूर्नामेंट की रचना पूरी तरह व्यावसायिक हितों को ध्यान में रखते हुए की। टूर्नामेंट को फ्रेंचाइजी आधारित प्रणाली के आधार पर शुरू किया गया। इन फ्रेंचाइजियों को नीलामी के लिए रखा गया। आठ टीमों का गठन किया गया। इनकी नीलामी अरबों रुपयों में हुई। देश के बड़े-बडे व्यापारिक घरानों और बॉलीवुड सितारों ने इन टीमों पर पैसा लगाया। इनका मुख्य उद्देश्य इस खेल में किए गए इन्वेस्मेंट से पैसा कमाना था। व्यापारिक घराने और बॉलीवुड ग्लैमर की उपस्थिति ने इस टूर्नामेंट को पूरी तरह व्यवसाय बना दिया। चीयर लीडर्स, खिलाडियों और बॉलीवुड हीरोइनों की रात भर चलने वाली पार्टियों ने मीडिया में हलचल तो मचाए रखी मगर खबर थी कि सट्टेबाजी के लिए ये पार्टियां ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार थीं। बाद में बीसीसीआई ने इन पार्टियों पर पूरी तरह रोक भी लगा दी।

दाउद पर शक
पाकिस्तान में बैठे अंडरवल्ड डॉन दाउद इब्राहिम का नाम तो शुरू से ही इस खेल में सट्टेबाजी से जुडा हुआ है। उसे इस खेल का सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। बताया जा रहा है कि दाउद ने इस समय क्रिकेट में सट्टेबाजी का कारोबार कराची के रहने वाले लालचंद उर्फ एल सी के हवाले कर रखा है। माना जा रहा है कि दाउद का स्वास्थ्य इस समय ठीक नहीं चल रहा है और उसका दायां हाथ छोटा शकील कई देशों की सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर होने के कारण इस समय छुपकर बैठा है इसलिए दाउद लालचंद के माध्यम से सट्टा कारोबार चला रहा है। एजेंसियों के अनुसार एलसी ने भारत के कई सट्टेबाजों से संपर्क कर उनको अपने जाल में फंसा रखा है और उनके माध्यम से आईपीएल में सट्टेबाजी करवाता है।
एलसी के संपर्क मुख्य रूप से भारत के जयपुर, भोपाल, कोलकाता और लुधियाना के सट्टेबाजों से हैं। इसमें भी खासतौर पर जयपुर के सट्टेबाजों से उसके विशेष संपर्क है। कुछ दिन पहले ही जयपुर पुलिस की गिरफ्त में आए सट्टेबाज दीपक पटवारी और राकेश गंगवाल से पूछताछ और उनके मोबाइलों में मिली कॉल डिटेल से पता चलता है कि इनके तार दुबई में बैठे लालचंद से सीधे जुड़े हुए थे और इसके अलावा मध्यप्रदेश, दिल्ली, पंजाब और कोलकाता के सटोरिये भी इन दोनों के संपर्क में थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार आईपीएल में खेल रहे एक दर्जन से ज्यादा खिलाड़ी इन सटोरियों के संपर्क में थे। इनके स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस इन खिलाडिय़ों की कॉल डिटेल और संपर्क सूत्रों की जांच करने में जुटी हुई है।
स्पॉट फिक्सिंग में सटोरिये कैच छोडने, रन आउट छोडऩे, किस ओवर की कौनसी बॉल नो—बॉल डाली जाएगी, कौन खिलाड़ी रन आउट होगा जैसे निर्देश खिलाडियों तक पहुंचा देते हैं और इसकी सूचना अपने नेटवर्क को दे देते हैं। इस प्रकार की सूचना मिलने के बाद बुकी सौदे बुक करते हैं।

अपना सम्मान खुद करना होगा
यूं तो पहले भी मैचों पर ही सट्टा लगता था मगर और ज्यादा पैसा कमाने के लिए सट्टेबाज मैचों के परिणाम अपनी मर्जी से फिक्स करवाने और स्पॉट फिक्सिंग के लिए सीधे खिलाडियों को ही अपने जाल में फंसाने लगे। दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए, आस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर जैसे खिलाड़ी भी सट्टेबाजों के चुंगल में फंस चुके हैं। बॉलीवुड के सुपर स्टार सलमाल खान के भाई अभिनेता अरबाज खान को भी पिछले साल पुलिस ने क्रिकेट सट्टबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया था। अरबाज में माना था कि वो पिछले 6 सालों से क्रिकेट में सट्टेबाजी कर रहा था। इन सब प्रकरणों के सामने आने से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्रिकेट में सट्टेबाजों की पहुंच कहां तक हो गई है। आए दिन सामने आ रहे इस तरह के प्रकरणों से इस खेल की प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुुंचा है और सभी देशों के क्रिकेट बोर्ड इस पर कितनी गंभीर हैं,यह इस बात से पता चलता है कि अगले माह शुरू होने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट टूर्नामेंट विश्वकप में सभी देश अपनी टीमों के साथ—साथ एक जांच अधिकारी भी भेजेंगे जो टीम के साथ ही रहेगा और टीम के प्रत्येक खिलाडी की गतिविधियों, उनसे संपर्क करने वालों और उनके फोन कॉलों पर नजर रखेगा। आखिर ऐसी नौबत क्यूं आई और क्रिकेट की प्रतिष्ठा बचाने के लिए क्या किया जा सकता है। इसकी जिम्मेदारी सबसे पहले खुद खिलाड़ी को ही उठानी होगी अन्यथा वो पैसा तो चाहे बना लेंगे लेकिन उनको दिलो—जान से चाहने वाले समर्थकों के दिलों से अपना सम्मान खो देंगे।

शुरुआत से ही सट्टेबाजी के बादल
व्यावसायिकता की होड़ में शायद इन टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले ही इसमें सट्टेबाजी के बीज डाल दिए गए थे। टूर्नामेंट की शुरुआत से ही यह अफवाह सब जगह पर थी कि ललित मोदी ने खुद भी मोटा पैसा इस टूर्नामेंट में राजस्थान रॉयल्स टीम पर लगाया है और पहले ही सत्र में जब कमजोर मानी जा रही रॉयल्स टीम ने खिताब जीता तो चर्चाएं और तेजी से फैली। लेकिन जब तक चोरी पकड़ी नहीं जाए तब तक साहूकार ही कहलाते हैं।

पाप का घड़ा फूटा
पर अपराध कभी छिपता नहीं है। पाप का घड़ा वर्ष 2013 में प्रतियोगिता के 6 ठे संस्करण में फूट ही गया। राजस्थान रॉयल्स की तरफ से गेंदबाजी करने वाले तीन खिलाडी श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चह्वाण स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिए गए।
कभी टीम इंडिया के शानदार गेंदबाज रहे श्रीसंत ने पुलिस हिरासत में माना कि गलती हो गई। बीसीसीआई अध्यक्ष और चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन जो चेन्नई सुपर किंग्स टीम के प्रिंसिपल भी थे, और राजस्थान रॉयल्स टीम के सह मालिक राज कुंद्रा को भी कोर्ट ने सट्टेबाजी में लिप्त माना। इन दोनों के क्रिकेट से जुड़ी गतिविधियों पर आजीवन पाबंदी लगा दी गई। चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स टीम को दो-दो साल के लिए टूर्नामेंट से सस्पेंड कर दिया गया।
इन प्रकरणों से इस टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा को गहरा धक्का लगा। खेल प्रेमियों ने खुद को ठगा हुआ सा महसूस किया। भले ही बाद में दिल्ली की एक अदालत ने एस श्रीसंत और अन्य दोनों क्रिकेटरों को स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में सबूतों के अभाव में आरोपों से बरी कर दिया हो मगर खेल प्रेमियों के दिलों में संदेह के बादल कम नहीं हो सके।

शारजाह में सट्टेबाजों की घुसपैठ
जब से एकदिवसीय क्रिकेट की शुरुआत हुई थी तब से ही माना जा रहा है कि इस खेल में सट्टेबाजी की शुरुआत पूरी तरह से हो गई थी। शारजाह और खाड़ी देशों में शुरू हुए एकदिवसीय टूर्नामेंटो से सट्टेबाजों ने इस खेल में अंदर तक घुसपैठ की। उनको यह कारोबार रास आ गया। शाहजाह में जब सट्टेबाजी की खबरें सामने आने लगी, अंडरवल्र्ड सरगना दाउद इब्राहिम हर मैच में स्टेडियम में नजर आने लगा और मैचों में एन वक्त पर जिस तरह से उतार—चढाव दिखने लगे तो संदेह के बादल उमडऩे लगे। इसके बाद बीसीसीआई ने भारतीय टीम पर खाड़ी देशों में होने वाले टूर्नामेंटों में भाग लेने पर ही रोक लगा दी।

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