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पार्टियां बताएं-अपराधियों को क्यों दिया टिकट?

राजनीति के अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राजनीतिक दलों को आदेश दिया है कि वे अपने उम्मीदवारों पर दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी और इनके चयन के कारण अपनी वेबसाइटों पर डालें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा उम्मीदवारों के चयन के 48 घंटे के भीतर हो जाना चाहिए। राजनीतिक दलों को ये जानकारियां अपने फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के अलावा एक राष्ट्रीय और एक स्थानीय अखबार में भी देनी होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 72 घंटों के भीतर ये जानकारियां चुनाव आयोग के पास भी पहुंच जानी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा, उम्मीदवारों को चुनने की वजह उनकी योग्यता होनी चाहिए, यह नहीं कि वे जीत सकते हैं। जीतने की संभावना अकेला कारण नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार अगर राजनीतिक दल जानकारियां नहीं देते या चुनाव आयोग इस आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं करता तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा।
सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की एक पांच सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर तुरंत कानून बनाने के लिए कहा था। उसका कहना था कि इसके जरिये ऐसे लोगों के चुनाव लड़ने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर प्रतिबंध लगाया जाए जिन पर गंभीर मामले चल रहे हैं। लेकिन कुछ नहीं हुआ। भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका दाखिल की थी। इसकी सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा था कि उम्मीदवारों के खिलाफ मामलों की जानकारियां सार्वजनिक किए जाने का कोई असर नहीं हो रहा और राजनीतिक दलों को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे ऐसे लोगों को टिकट ही न दें।
जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने इसे राष्ट्रहित का मामला बताते हुए बीती 31 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने कहा था कि इस समस्या को रोकने के लिए कुछ कदम उठाने होंगे। 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने वाले 43 फीसदी नेता आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

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